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मां शीतला को क्यों चढ़ाया जाता है बासी भोजन? कड़ा धाम की अनोखी आस्था, जानें बसियौड़ा की मान्यता


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मां शीतला को क्यों चढ़ाया जाता है बासी भोजन? कड़ा धाम की अनोखी आस्था

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Kaushambi News: चैत्र की नवरात्रि मे कड़ा धाम में प्रदेश नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु मां शीतला का दर्शन करने आते हैं. खासतौर से दरबार में पूर्वांचल के लोग अधिक संख्या मे आते हैं. यहां पर चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के दिन माता को बसियौड़ा यानी बासी भोजन का भोग चढ़ाया जाता है.

कौशांबी: उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के पवित्र कड़ा धाम में स्थित मां शीतला देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. इस मंदिर की एक अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है. चैत्र की नवरात्रि मे कड़ा धाम में प्रदेश नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु मां शीतला का दर्शन करने आते हैं. खासतौर से दरबार में पूर्वांचल के लोग अधिक संख्या मे आते हैं. यहां पर चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के दिन माता को बसियौड़ा यानी बासी भोजन का भोग चढ़ाया जाता है.

पुजारियों की मानें तो माता शीतला देवी को ठंडा और बासी भोजन बहुत ही प्रिय होती है. यही कारण है कि भक्त अष्टमी के दिन माता को ठंडा और बासी भोजन चढ़ाते हैं. इस भोग में पूरी, हलवा, पूड़ी धमालू, कढ़ी, चावल, दही, खीर और अन्य बासी व्यंजन शामिल किए जाते हैं.

प्रसाद के रूप में होता है वितरण
माता के दरबार में बसियौड़ा भोजन को सप्तमी के दिन ही शाम को बनाकर तैयार कर लिया जाता है. फिर उसके बाद भोजन को मंदिर प्रांगण में रख दिया जाता है. जब वह बासी हो जाता है, तो अष्टमी के दिन पूजा कर विधि-विधान से बसियौड़ा भोग चढ़ाया जाता है और उस भोजन को चढ़ाने के बाद आए हुए सभी भक्तों और श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरण किया जाता है. कहा जाता है कि इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद चेचक जैसी बीमारी नहीं होती है. इसलिए इस प्रसाद को ग्रहण करने के लिए भक्तों की मंदिर प्रांगण में लाइन लग जाती है.

घर-परिवार में बनी रहती है सुख-शांति
माता शीतला देवी को यह भोग अर्पित करने से चेचक, बुखार और त्वचा से जुड़े रोगों से रक्षा होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. अष्टमी की सुबह हजारों श्रद्धालु मां शीतला देवी के मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और माता को बसियौड़ा का भोग चढ़ाते हैं. इसके बाद यही भोग प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है और सभी श्रद्धालु इसे ग्रहण करते हैं.

आदि शक्तियों में सबसे बड़ी मां शीतला
मंदिर समिति के अध्यक्ष आत्म प्रकाश पांडे ने बताया कि माता शीतला देवी आदि शक्तियों में सबसे बड़ी देवी हैं. इसलिए माता को बड़ी माता और बुढ़िया माता भी कहा जाता है. माता शीतला देवी को बसियौड़ा भोजन चढ़ाया जाता है, जिसे ठंडा या बासी भोजन कहता है. यह भोजन माता को बहुत ही प्रिय है. बसियौड़ा भोग चढ़ाने के लिए सप्तमी की रात को सभी प्रकार के व्यंजनों को मिलाकर भोजन तैयार किया जाता है, फिर उसे अष्टमी के दिन माता के दरबार में चढ़ाया जाता है. भोग चढ़ाने के बाद प्रसाद के रूप में सभी भक्तों को इसे वितरण कर दिया जाता है.

मंगल कामना के लिए मां से प्रार्थना
अध्यक्ष आत्म प्रकाश पांडे ने बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को चेचक जैसी गंभीर बीमारी होती है, तो लोग मां से अपनी मंगल कामना के लिए प्रार्थना और पूजा पाठ करते हैं और माता के नाम उपवास भी रखते हैं. उपवास में चढ़ाया हुआ प्रसाद ही ग्रहण करके पूरा दिन काटते हैं. इसलिए इस वर्ष अष्टमी यानी 11 तारीख को बसियौड़ा वाला भोग चढ़ेगा और सभी भक्तगण प्रसाद ग्रहण करेंगे.

About the Author

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Bharat.one से जुड़ गए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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