Pushya Nakshatra : पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति जीवन में खूब तरक्की करते हैं, लेकिन इसमें इनकी मेहनत और लगनशीलता का बड़ा योगदान होता है. बचपन में किये गये संघर्ष के कारण कम उम्र में ही दुनियादारी और जीवन के उद्देश्यों को समझ जाते हैं. इस नक्षत्र का प्रभाव कर्क राशि वालों पर देखा जाता है क्योंकि इसके चारों चरण कर्क राशि में होते हैं. कर्क राशि का स्वामी चन्द्रमा होने के कारण इस नक्षत्र के व्यक्तियों का मन चंचल होता है. घूमना-फिरना इन्हें काफी पसंद होता है. विपरीत लिंग के व्यक्तियों के प्रति इनमें विशेष लगाव होता है. दांपत्य जीवन आमतौर इनका सुखद होता है क्योंकि जीवनसाथी को आदर और सम्मान देते हैं. आर्थिक मामलों में इनका हाथ सख्त होता है, धन खर्च करने से पहले काफी सोच-विचार करते हैं, लेकिन कोई इनके पास मदद की आस लिये आता है, तब व्यक्तिगत लाभ कि परवाह किये बिना सहायता करते हैं.
सामाजिक कार्यों में इनकी विशेष रूचि होती है. कमज़ोर और जरूरतमंदों की सहायता में यह सदैव आगे रहते हैं. इनके जीवन में न्याय और सत्य का बड़ा महत्व होता है. इन्हें एक स्थान और एक स्थिति में लंबे समय तक टिके रहना पसंद नहीं होता है. जीवन का तीसरा भाग अधिक सुखमय होता है क्योंकि जवानी में खूब मेहनत करते हैं और धन कमाते हैं.
इस नक्षत्र में उत्पन्न स्त्रियां भी बहुत ही लजीली, शर्मीली और धीमे स्वर में वार्तालाप करने वाली होती हैं. दांपत्य जीवन में ऐसी स्त्रियों को कभी-कभी पति के संदेह का सामना करना पड़ सकता है.
पुष्य नक्षत्र के लिए उपयुक्त प्रोफेशन
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोगों को जीवन में काफी मान-सम्मान मिलता है. ये एक अच्छे लेखक, कवि, दार्शनिक, साहित्यकार, अधिकारी, मंत्री, राजा, तकनीकी मस्तिष्क वाले पेशे में सफल हो सकते हैं.
पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वालों का स्वास्थ्य
इन्हें जीवन में आलस्य को त्यागने और उत्साहपूर्ण जीवन जीने की जरूरत होती है. महिलाओं की बात करें तो उन्हें 20 साल की उम्र तक कुछ स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. इन्हें त्वचा से जुड़ी छोटी-मोटी समस्याएं होती रहती हैं.
पुष्य नक्षत्र से जुड़े कुछ उपाय
- पुष्य नक्षत्र में भगवान गणेश, भगवान विष्णु, और महालक्ष्मी की पूजा करें.
- इस दिन शनिदेव की भी पूजा करें, क्योंकि पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि को माना जाता है.
- गुरुवार को पुष्य नक्षत्र होने पर देवगुरु बृहस्पति की भी पूजा करें.
- गुरु पुष्य योग में जरूरतमंद लोगों को दान करें.
- इस दिन कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें.
- गुरु पुष्य योग में चांदी का लक्ष्मी यंत्र या चांदी से बना कोई चौकोर टुकड़ा खरीदकर उसकी पूजा करें.
- पुष्य नक्षत्र में दाल, चावल, खिचड़ी, बेसन, कढ़ी, बूंदी की लड्डू वगैरह का सेवन करें.
- इस दिन किसी भी नए मंत्र की जाप की शुरुआत करें.
- पुष्य नक्षत्र में शाम के समय मां लक्ष्मी की पूजा करें.
- तिजोरी में हमेशा 10-10 के नोटों की गड्डी और कुछ पीतल-तांबे के सिक्के रखें.
- तिजोरी को ऐसी जगह रखें, जिससे उसका दरवाज़ा उत्तर दिशा में खुले.
FIRST PUBLISHED : November 21, 2024, 09:46 IST
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