Kundli Dosha: अक्सर आपने बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा-“इस बच्चे का योग ठीक नहीं है” या “कुंडली में दोष है.” ज्योतिष में ऐसे योगों का जिक्र आम है और खासकर जन्म के समय बने ग्रह-नक्षत्रों के योग को जीवन की दिशा से जोड़ा जाता है. हाल के दिनों में सोशल मीडिया और ज्योतिष चैनलों पर 27 योगों और उनमें से 9 अशुभ योगों की चर्चा फिर तेज हो गई है. कई लोग जानना चाहते हैं कि क्या सच में जन्म के समय बना कोई योग जीवन भर असर डालता है, और अगर हां तो क्या उसका उपाय संभव है. इसी विषय पर हमने ज्योतिषाचार्यों और आम लोगों के अनुभवों को खंगाला. सामने आया कि इन योगों को लेकर लोगों में डर जितना है, उतनी ही आस्था भी, लेकिन सच क्या है-यह समझना जरूरी है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
27 योगों में से 9 क्यों माने जाते हैं अशुभ?
वैदिक ज्योतिष में 27 योगों का वर्णन मिलता है, जो सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से बनते हैं. इन्हें जीवन की घटनाओं और स्वभाव से जोड़ा जाता है. ज्योतिष मान्यता के अनुसार इनमें से 9 योग ऐसे हैं जिन्हें अशुभ या चुनौतीपूर्ण माना गया है.
अशुभ योगों की सूची
इन 9 योगों में मुख्य रूप से-विष्कुंभ, अतिगंड, शूल, गंड, व्याघात, वज्र, व्यतिपात, परिघ और वैधृति योग शामिल बताए जाते हैं. मान्यता है कि इन योगों में जन्म लेने वाले जातकों को जीवन में संघर्ष ज्यादा झेलना पड़ सकता है. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि ये योग व्यक्ति के स्वभाव, स्वास्थ्य, रिश्तों और निर्णय क्षमता पर असर डाल सकते हैं. हालांकि, यह असर हर व्यक्ति में समान नहीं होता-यह उसकी पूरी कुंडली पर निर्भर करता है.
क्या सच में अशुभ योग जीवन में बाधाएं लाते हैं?
ग्रामीण इलाकों में आज भी बच्चे के जन्म के बाद कुंडली देखकर योग का आकलन किया जाता है. मध्य प्रदेश के एक गांव में रहने वाली सीमा बाई बताती हैं कि उनके बेटे का जन्म व्यतिपात योग में बताया गया था. परिवार ने पूजा करवाई और बच्चे की सेहत को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती. आज वह पूरी तरह स्वस्थ और पढ़ाई में तेज है. ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहां लोग मानते हैं कि पूजा या उपाय के बाद स्थिति बेहतर हुई. वहीं कुछ लोग इसे केवल मानसिक संतोष मानते हैं.
ज्योतिषाचार्य क्या कहते हैं?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अशुभ योग का मतलब “निश्चित दुर्भाग्य” नहीं होता. उनका कहना है कि यह केवल संभावित चुनौतियों का संकेत देता है. जैसे-
-व्याघात योग: बाधाएं या अचानक रुकावट
-शूल योग: मानसिक तनाव या संघर्ष
-वैधृति योग: रिश्तों में दूरी
लेकिन ये केवल सामान्य प्रवृत्तियां हैं, तय भविष्य नहीं.
अशुभ योग के उपाय: आस्था या मनोबल?
ज्योतिष परंपरा में इन योगों की शांति पूजा, दान या विशेष मंत्र जाप का उल्लेख मिलता है. माना जाता है कि इससे ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव कम होता है. गांवों में आज भी बच्चे के जन्म के बाद “योग शांति” कराई जाती है. कई परिवार इसे जरूरी मानते हैं, खासकर जब कुंडली में अशुभ योग बताया जाए.
बदलती सोच: डर से समझ तक
नई पीढ़ी ज्योतिष को पूरी तरह नकार भी नहीं रही और आंख मूंदकर मान भी नहीं रही. लोग अब इसे संभावित संकेत या सांस्कृतिक परंपरा की तरह देख रहे हैं. शहरों में ज्योतिष सलाह लेने वाले कई लोग कहते हैं कि वे इसे “गाइड” की तरह लेते हैं, फैसला नहीं. वहीं गांवों में आस्था अभी भी मजबूत है, लेकिन वहां भी लोग शिक्षा और अनुभव के आधार पर समझ बना रहे हैं.
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https://hindi.news18.com/astro/astro-tips-9-ashubh-yog-in-kundli-know-its-meaning-effects-and-simple-remedies-ws-el-10233717.html







