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घर के निर्माण के समय दिशाओं का होता है बड़ा महत्व, वरना लगता है वास्तुदोष, ज्योतिषी से जानिए कहां क्या होना चाहिए?

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ऋषिकेश: वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बड़ा महत्व होता है. क्योंकि हर दिशा का एक खास प्रभाव होता है. जैसे पूर्व दिशा से सकारात्मक ऊर्जा आती है, वहीं उत्तर दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी है. ऐसे ही दक्षिण दिशा स्थिरता देती है और आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) रसोई के लिए, जबकि ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) पूजा स्थल के लिए शुभ है. इन दिशाओं का सही उपयोग घर में सुख-समृद्धि और शांति बनाए रखने में सहायक होता है. वहीं इन दिशाओं में गलत चीजें रखने से घर में वास्तु दोष भी लग सकता है.

वास्तु शास्त्र में दिशाओं का महत्व

Bharat.one के साथ बातचीत के दौरान उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित ग्रह स्थानम के ज्योतिषी अखिलेश ने बताया कि वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का निर्माण करते समय दिशाओं का विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने और वास्तुदोष को कम करने में सहायक होता है. एक आदर्श मकान का मुख्य द्वार (मेन गेट) हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में होना शुभ माना गया है. ऐसा माना जाता है कि सूर्योदय की दिशा यानी पूर्व दिशा से घर में सकारात्मक और ऊर्जावान किरणें प्रवेश करती हैं, जो घर के वातावरण को सुखद और शांतिमय बनाती हैं.

वास्तु अनुसार सही स्थान का चयन

घर का ढलान भी पूर्व, उत्तर, या ईशान कोण की ओर होना चाहिए, जिससे जल प्रवाह सही दिशा में हो और घर में समृद्धि बनी रहे. घर के रसोईघर को आग्नेय कोण में, यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए. रसोईघर और टॉयलेट को पास-पास नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है. वहीं घर के उत्तर दिशा में सबसे ज्यादा खिड़कियां और दरवाजे होने चाहिए. इससे ताजगी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अच्छा बना रहता है. घर के दक्षिण और पश्चिम दिशा में भारी सामान रखना चाहिए, जैसे अलमारी, फर्नीचर आदि. इससे घर में संतुलन बना रहता है और घर के लोग स्थिरता का अनुभव करते हैं. बैठक कक्ष यानी लिविंग रूम को घर की उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए, क्योंकि यह दिशा अतिथि स्वागत के लिए शुभ मानी गई है. इसी तरह घर का पूजा स्थल भी उत्तर-पूर्व दिशा में होना सबसे अच्छा माना गया है. बेडरूम को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए, जो अच्छी नींद और स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है. वहीं स्नानघर या बाथरूम को पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए. यह दिशा बाथरूम के लिए अनुकूल मानी जाती है. साथ ही घर की सीढ़ियां दक्षिण दिशा में होना भी शुभ होता है, क्योंकि इससे घर के लोगों की तरक्की होती है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.


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https://hindi.news18.com/news/astro/according-to-vastu-shastra-know-the-importance-of-directions-in-house-construction-local18-8843268.html

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