कुंडली में सूर्य ग्रह रुष्ट हैं तो पिता को प्रसन्न करें.चंद्र कष्ट पहुंचा रहा है तो माता या माता समान स्त्रियों को खुश रखें.
Strengthen All 9 Planets : आपने बड़े-बुजुर्गों के मुंह हमेशा एक बात सुनी होगी, जैसे कर्म करोगे, वैसा फल मिलेगा. हमारे धार्मिक पुराणों में भी यही कहा गया है- जो बोओगे, वही काटना होगा. इसका मतलब यह कि मनुष्य के कर्म ही उसके जीवन में सुख और दुख सुनिश्चित करते हैं. भोपाल निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित योगेश चौरे के अनुसार, जब भी आपकी जिंदगी में कोई उथल-पुथल होती है तो इसे किसी ना किसी ग्रह से जोड़कर देखा जाता है और साथ ही यह जोड़ा जाता है आपके कर्मों से भी.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जब भी कोई ग्रह अशांत होता है तो इसके लिए मंत्र जाप, रत्नों को धारण करने के लिए कई सारे उपाय, पूजन और हवन बताए जाते हैं. लेकिन यदि आप अपने आचरण यानी कि कर्म ठीक कर लेते हैं तो इन सब के बिना भी ग्रहों को शांत कराया जा सकता है. कैसे? आाइए जानते हैं.
इन कर्मों से जीवन में आएगी सकारात्मकता
हमारे धर्मशास्त्रों के अनुसार, किसी व्यक्ति के मात्र प्रणाम करने से और वृद्धों की सेवा करने से आयु, विद्या, यश व बल की प्राप्ति की जा सकती है. यदि आपकी कुंडली में ग्रह अशांत हैं तो आप अपने व्यवहार में बदलाव लाएं, परोपकारी बनें और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करें. ऐसा करने से ग्रह खुद व खुद शांत हो जाएंगे.
इन लोगों को खुश करने से ये ग्रह शांत होंगे
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, यदि आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह रुष्ट हैं तो पिता को प्रसन्न करें. वहीं यदि चंद्र किसी तरह से कष्ट पहुंचा रहा है तो माता या माता समान स्त्रियों को खुश रखें. यदि मंगल आपका अमंगल कर रहा है तो छोटे भाई व बहन को खुश करें. यदि बुध से आप परेशान हैं तो मामा और बंधुओं को खुश करें.
यदि गुरु नाराज हैं तो अपने गुरुजन और बुजुर्गों को खुश करें. यदि शुक्र रुष्ट हैं तो पत्नी को प्रसन्न करें. शनि आपको कष्ट दे रहा है तो दास-दासी को खुश रखें और यदि राहु परेशानी का कारण बन रहा है तो किसी दिव्यांग को खुश करें. इसी प्रकार केतु रुष्ट है तो दीन-हीनों को खुश करें और उनकी सहायता करें.
FIRST PUBLISHED : October 26, 2024, 11:16 IST
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