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Baba Mahakal and Kashi Vishwanath Jyotirlinga decorated in Tricolor on republic day 26th January | 26 जनवरी पर केसरिया-सफेद-हरे रंग में सजे बाबा महाकाल और काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

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26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर बाबा महाकाल ज्योतिर्लिंग और काशी विश्वनाथ धाम में महादेव को खास तरह से सजाया गया है. मंदिर का शिखर केसरिया, सफेद और हरे रंग की लाइटों से जगमगाया है. वहीं काशी में बाबा को तीन रंग की माला पहनाई गई है. गणतंत्र दिवस पर इन दोनों जगहों पर महादेव का अनूठा दृश्य देखने को मिला है.

Jyotirlinga Temple On Republic Day: 26 जनवरी को आज पूरे देश में गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है. देश के कोने-कोने में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. स्कूलों में गणतंत्र दिवस से जुड़े कार्यक्रम किए जा रहे हैं. वहीं इस मौके पर उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम को विशेष रूप से सजाया गया है. दोनों जगहों पर महादेव को केसरिया-सफेद-हरे रंग में सजाया गया है. बाबा महाकाल का त्रिरंगे से जुड़ा तिलक लगाया गया है तो काशी विश्नाथ धाम में केसरिया-सफेद-हरे रंग की माला से सजाया गया है. गणतंत्र दिवस पर इन दोनों जगहों पर महादेव का अनूठा दृश्य देखने को मिला है.

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को तिरंगे की रोशनी से सजाया गया. रात के समय मंदिर का शिखर केसरिया, सफेद और हरे रंग की लाइटों से जगमगाया. यह सजावट देश के राष्ट्रीय ध्वज का प्रतीक है. शिखर पर बना ओम का प्रकाश चिन्ह श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा.

इसके साथ ही, प्रातःकाल होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया. विशेष पर्व के उपलक्ष्य में बाबा का भव्य और आकर्षक शृंगार किया गया, जिसमें सबसे खास रहा उनके मस्तक पर सुशोभित ‘तिरंगा तिलक’.

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राष्ट्रभक्ति के रंगों में रंगे बाबा के इस स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. भस्म आरती के पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा महाआरती संपन्न की गई. इस दिव्य दर्शन से पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के साथ भारत माता की जय के उद्घोष से गूंज उठा.

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भस्म आरती का विशेष धार्मिक और पौराणिक महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल निराकार स्वरूप में होते हैं, इसीलिए महिलाएं इस आरती में शामिल नहीं होती हैं. महिलाएं सिर पर घूंघट या ओढ़नी डालकर ही दर्शन करती हैं. इस परंपरा का मंदिर में सख्ती से पालन किया जाता है.

वहीं काशी विश्वनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं. काशी (वाराणसी) को मोक्ष की नगरी कहा जाता है. मान्यता है कि यहां स्वयं महादेव वास करते हैं इसलिए काशी विश्वनाथ की पूजा को विशेष आध्यात्मिक फलदायी माना गया है.

शास्त्रों के अनुसार काशी में शिव की उपासना से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति (मोक्ष) का मार्ग प्रशस्त होता है. श्रद्धा से दर्शन-पूजन करने पर संचित पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है. रोग, शोक, भय और मानसिक तनाव में शांति मिलती है, शिव आशुतोष हैं और शीघ्र प्रसन्न होते हैं.

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26 जनवरी पर तिरंगे में सजे बाबा महाकाल और काशी विश्वनाथ, करें महादेव के दर्शन


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