Last Updated:
मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है और आज बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद हो रहे हैं. कपाट बंद होने की आखिरी बेला में यहां का वातावरण भक्तिमय गीतों, मंत्रोच्चार और भावनाओं से भर जाता है. माना जाता है कि बद्रीनाथ धाम के दर्शन से व्यक्ति के मन में भी धैर्य, ज्ञान और सकारात्मकता का संचार होता है.

उत्तराखंड की ऊंची चोटियों के बीच बसे बद्रीनाथ धाम में इस बार विवाह पंचमी का दिन बेहद खास होने वाला है. आज इसी शुभ तिथि पर भगवान बद्रीनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे. हर साल की तरह इस बार भी कपाट बंद होने से पहले धाम में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, क्योंकि माना जाता है कि कपाट बंद होने से ठीक पहले किए गए दर्शन बेहद फलदायी होते हैं. सोमवार को पंच पूजा के चौथे दिन मां लक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई और परंपरा के अनुसार कढ़ाई प्रसाद अर्पित किया गया. इसके बाद माता लक्ष्मी को बद्रीनाथ गर्भगृह में विराजमान होने का निमंत्रण दिया गया.

आज दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर बद्रीनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे. इसके साथ ही बद्रीनाथ धाम का छह महीने का शीतकाल आरंभ हो जाएगा. इस अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है. चारों ओर रंग-बिरंगी लाइटों की जगमगाहट और ताजे फूलों की महक से पूरा धाम एक दिव्य लोक जैसा नजर आ रहा है. शीतकालीन में जोशीमठ में भगवान बद्रीनाथ की पूजा की जाती है.

बता दें कि 21 नवंबर से बद्रीनाथ धाम में पंच पूजाएं शुरू हुई थीं. इसके तहत गणेश मंदिर, आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी स्थल के कपाट भी विधि-विधान से बंद किए गए. जैसे-जैसे कपाट बंद होने का समय नजदीक आता गया, वैसे-वैसे मंदिर में वेद ऋचाओं का वाचन भी पूरा कर दिया गया. यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ के बाद बद्रीनाथ धाम को मोक्ष मार्ग का अंतिम द्वार कहा गया है. चार धाम यात्रा में इसे पूर्णता का प्रतीक माना जाता है, जैसे चरम साधना का अंतिम पड़ाव.
Add Bharat.one as
Preferred Source on Google

सोमवार सुबह बद्रीनाथ के मुख्य पुजारी अमरनाथ नंबूदरी माता लक्ष्मी के मंदिर पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्हें गर्भगृह में विराजमान होने का आमंत्रण दिया. इस विशेष क्षण के बाद मंदिर में कपाट बंद होने की अंतिम तैयारियां शुरू हो गईं. सोमवार को माता लक्ष्मी के मंदिर में विशेष पूजा की गई.

रावल यानी मुख्य पुजारी ने परंपरा के अनुसार, माता लक्ष्मी को मुख्य गर्भगृह में आने का औपचारिक निमंत्रण दिया. गर्मियों के छह महीनों में माता लक्ष्मी मंदिर परिसर में स्थित अपने स्थल पर विराजमान रहती हैं, लेकिन सर्दियों के दौरान मां मुख्य मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होती हैं. कपाट बंद होने से पहले भक्त बड़ी संख्या में बद्रीनाथ धाम में पहुंच रहे हैं. सभी लोग कपाट बंद होने की इस ऐतिहासिक और भावुक करने वाली प्रक्रिया के साक्षी बनना चाहते हैं.

जब बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होते हैं, तब भगवान की मूर्ति को परंपरा के अनुसार जोशीमठ ले जाया जाता है. शीतकाल में पूजन वहीं होता है और धाम पर बर्फ की मोटी चादर जम जाती है. अगली गर्मियों में कपाट फिर से खोले जाते हैं और यात्रा नई शुरुआत के साथ आगे बढ़ती है.

बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु के बद्री-नारायण स्वरूप को समर्पित है. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से भक्त के जीवन में शांति, समाधान और आत्मविश्वास बढ़ता है. विष्णु के इस स्वरूप को कल्याण के देवता माना जाता है. बर्फीली हवाओं और पवित्र अलकनंदा के संगम वाले इस धाम की शांति और दिव्यता कुछ ऐसी है कि यहां पहुंचकर हर भक्त को एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव होता है.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
https://hindi.news18.com/photogallery/dharm/badrinath-dham-kapat-closed-today-2025-now-badrinath-will-give-darshan-in-joshimath-ws-kl-9889471.html

















