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Basant Panchami 2026 Today: बसंत पंचमी के मौके पर देशभर में कोई ना कोई कार्यक्रम होते रहते हैं. कहीं विशेष भोग बनाया जाता है तो कहीं पूजन-हवन किया जाता है. लेकिन इस खास मौके पर वृंदावन के शाहजी मंदिर में एक कमरा खोला जाता है, जिसे रहस्यमयी बताया जाता है. इस कमरे के दर्शन करने के लिए देश विदेश से लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं. आइए जानते हैं इस रहस्यमयी कमरे के बारे में खास बातें…
Basant Panchami 2026 Shahji Temple: माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हर वर्ष बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि आज है. इस दिन देशभर के मंदिर-मस्जिद कई कार्यक्रम किए जाते हैं और चारों तरफ पीला रंग ही दिखाई देता है. लेकिन बसंत पंचमी के पर्व का ब्रज मंडल में अलग महत्व है क्योंकि इस दिन से ही ब्रज में होली के पर्व की शुरुआत हो जाती है. ब्रज में बसंत पंचमी के साथ ही मंदिर में गुलाल उड़ने लगते हैं और मंदिर को पीले फूलों और रंगों से सजा दिया जाता है, लेकिन बसंत पंचमी के दिन वृंदावन के एक मंदिर में अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, जहां एक कमरे को देखने के लिए भक्त विदेशों से आते हैं. हम बात कर रहे हैं शाहजी मंदिर की, जिसे टेढ़े खंभे के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. आइए जानते हैं इस मंदिर के कमरे के बारे में खास बातें…
प्रभु राधारमणजी को समर्पित शाहजी मंदिर
शाहजी मंदिर या टेढ़े खंभे का मंदिर, प्रभु राधारमणजी को समर्पित है. मंदिर अपनी आस्था के साथ-साथ विशेष आयोजन और बनावट के लिए भी जाना जाता है. बसंत पंचमी के दिन मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं, जो देश के किसी और मंदिर में देखने को नहीं मिलते. इस मंदिर में रहस्यमी कमरे के दरवाजे खोले जाते हैं, जिसे बसंती कमरा कहा जाता है. यह कमरा साल में केवल दो ही दिन ही खुलता है. बसंत पंचमी के बाद यह कमरा अब सीधे सावन मास की त्रयोदशी और चतुर्दशी को ही खोला जाएगा.

साल में केवल एक बार खुलता है मंदिर
बसंती कमरे को साल में दो बार ही खोला जाता है और बसंत पंचमी के दिन पीले रंग, फूलों, और रंगीन वस्त्रों से सजाया जाता है. मंदिर में पीले वस्त्र पहले राधा रमणजी लाल भक्तों को दर्शन देते हैं. यह कमरा बसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करता है और खुद प्रभु पीले वस्त्र पहनकर सृष्टि में खुशियां और उत्साह मनाने का संकेत देते हैं. कमरे को बहुत ही आकर्षक तरीके से सजाया जाता है, जिसमें बेल्जियम से लाए झूमर भी शामिल होते हैं और इसके साथ ही राधा-कृष्ण की लीलाओं की छवियों को भी अंकित किया जाता है.
कमरा खोलने के बाद लगाया जाता है 56 भोग
बसंती कमरे को खोलने के साथ ही राधारमणजी को 56 भोज समर्पित किए जाते हैं, जिसमें खास तौर पर पीले व्यंजनों को शामिल किया जाता है. शाहजी मंदिर की बनावट भी अपने आप में अद्भुत है. मंदिर के बाहर बने टेढ़े खंभे भक्तों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं. खंभों की बनावट किसी सांप की तरह दिखती है. मंदिर की दीवारों पर जटिल नक्काशी और शिल्प कला को दिखाती बेहतरीन पेंटिंग को दीवारों पर अलंकृत किया है.

मंदिर में बड़े सिंहासन का भी महत्व
मंदिर में राजस्थानी, इटालियन और बेल्जियम कला का नमूना देखने को मिलेगा. मंदिर को बेल्जियम के झूमरों से सुसज्जित किया गया है. मंदिर में एक बड़ा सिंहासन भी रखा है, जिस पर राधारमणजी साल में एक बार सावन के महीने में आने वाली देवशयनी एकादशी पर बैठते हैं. माना जाता है कि उस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव को सृष्टि का भार सौंप कर निंद्रा में चले जाते हैं. प्रभु को सिंहासन पर बैठाना विश्राम का संकेत माना गया है.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें
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https://hindi.news18.com/news/dharm/basant-panchami-2026-vrindavan-shahji-mandir-mysterious-basanti-kamara-open-today-on-vasant-panchami-know-significance-and-history-ws-kl-10099436.html

















