Bhaum Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत हर मास कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को आता है, पर जब यह मंगलवार को पड़े तो इसे भौम प्रदोष कहते हैं. प्रदोष तिथि के दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करने से हर सुख की प्राप्ति होगी और ग्रहों के अशुभ प्रभाव में कमी आती है. भौम प्रदोष व्रत मंगल को संतुलित करता है, शिव कृपा देता है और जीवन में स्थिरता, शक्ति, सफलता और शांति लाता है. यह व्रत कठिन समय में राह खोलने वाला और पाप-क्षय कराने वाला अत्यंत प्रभावशाली साधन माना गया है. भौम प्रदोष पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. इन शुभ योग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं भौम प्रदोष व्रत का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त…
भौम प्रदोष व्रत का महत्व
भौम प्रदोष व्रत से घर में शांति, आपसी समझ और सकारात्मक माहौल बढ़ता है. शिवजी की कृपा से पुराने रोग, तनाव और अचानक होने वाली परेशानियों से राहत मिलती है. साथ ही जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष हो, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना जाता है. इस दिन व्रत रखकर भक्त भाव से की गई प्रार्थना जल्दी फल देती है. जिन दंपतियों के जीवन में तनाव हो, उन्हें आज के दिन शिव–पार्वती का ध्यान करना बेहद शुभ माना गया है. इसी कारण इस व्रत को शिव-कृपा का विशेष अवसर कहा जाता है.

भौम प्रदोष व्रत 2025 आज
त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ – 2 दिसंबर, दोपहर 3 बजकर 57 मिनट से
त्रयोदशी तिथि का समापन – 3 दिसंबर, दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक
उदया तिथि के अनुसार आज भौम प्रदोष व्रत किया जा रहा है.
भौम प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त 2025
आज प्रदोष काल का समय शाम 5 बजकर 34 मिनट से रात 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. यही समय भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना गया है. इस दौरान पूजा-अर्चना करने से भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होता है और उनके जीवन से सभी प्रकार के भय, रोग और कष्ट दूर होते हैं.

भौम प्रदोष व्रत 2025 शुभ योग
सर्वाथ सिद्धि योग- 2 दिसंबर को सुबह 6 बजर 57 मिनट से रात 8 बजकर 51 मिनट तक रहेगा
अमृत सिद्धि योग- 2 दिसंबर सुबह 6 बजकर 57 मिनट से रात 08 बजकर 51 मिनट तक रहेगा
रवि योग- 2 दिसंबर को रात 8 बजकर 51 मिनट से देर रात 1 बजकर 22 मिनट तक रहेगा
शिवजी के मंत्र:
ॐ नमः शिवाय
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः
ऊँ ऐं ह्रीं शिव-गौरीमय-ह्रीं ऐं ऊँ
ऊँ नमो धनदाय स्वाहा
शिवजी रुद्र मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
प्रदोष स्तुति:
शिवाय नमस्तुभ्यं प्रदोषं पूजितं मया। क्षमस्व अपराधं मे करुणासागर प्रभो॥

भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि 2025
आज सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान व ध्यान से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें और फिर प्रदोष काल के व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पास के शिवालय में जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करें. इस दिन प्रदोष काल में भी पूजा की जाती है, इसके लिए आप सूर्यास्त से पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और शक्कर से अभिषेक करें. अगर यह संभव ना हो, तो सिर्फ जल और दूध से भी अभिषेक किया जा सकता है. शिवलिंग पर बेलपत्र, अक्षत, पुष्प, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें. इसके बाद महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जप करें और श्रद्धा से शिव तांडव स्तोत्र या शिव चालीसा का पाठ करें. पूजा के अंत में घी के दीपक से आरती करें और प्रसाद सभी में बांट दें.
शिवजी की आरती ‘ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ॐ जय शिव ओंकारा॥
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