Budh Pradosh Vrat : हिंदू धर्म में व्रत और पर्व केवल परंपरा नहीं बल्कि जीवन को संतुलन और सकारात्मक दिशा देने का माध्यम माने जाते हैं. प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है और हर माह त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. जब यह व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तब इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है. बुधवार का संबंध बुद्धि, वाणी, व्यापार और करियर से माना जाता है, इसलिए यह व्रत विशेष रूप से छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए लाभकारी माना जाता है. पौष माह का पहला प्रदोष व्रत इस बार खास है क्योंकि यह बुध प्रदोष के रूप में मनाया जा रहा है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
हिंदी पंचांग के अनुसार, पौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 16 दिसंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर 18 दिसंबर तड़के 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगी. प्रदोष काल की पूजा 17 दिसंबर, बुधवार को यानी आज की जा रही है. मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की उलझनें कम होती हैं और मन को शांति मिलती है. इस दिन की गई साधना से व्यक्ति के विचार स्पष्ट होते हैं और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है.
बुध प्रदोष व्रत का महत्व
बुध प्रदोष व्रत का सीधा संबंध बुद्धि, संवाद कौशल और आर्थिक स्थिति से जोड़ा जाता है. जो लोग बार-बार निर्णय में भ्रम महसूस करते हैं या करियर में रुकावट झेल रहे हैं, उनके लिए यह व्रत काफी उपयोगी माना जाता है. भगवान शिव को सभी ग्रहों का नियंत्रक कहा गया है, इसलिए उनकी पूजा से बुध ग्रह से जुड़े दोषों में राहत मिलती है. मान्यता है कि इस दिन शिव भक्ति करने से वाणी में मधुरता आती है और कामकाज में स्थिरता बनती है.

पूजा विधि
-बुध प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें. घर के पूजा स्थान को स्वच्छ रखें. पूरे दिन सात्विक भोजन करें और संभव हो तो उपवास रखें. शाम के समय, प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व होता है.
-सबसे पहले शिवलिंग पर जल, दूध और शहद अर्पित करें. इसके बाद बेलपत्र, सफेद फूल और चंदन चढ़ाएं. “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें. भगवान शिव के साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की भी पूजा करें. दीपक जलाकर शिव आरती करें और अंत में मन से अपनी परेशानी और इच्छा रखें.
इस दिन क्या करना चाहिए
बुध प्रदोष के दिन हरे रंग का उपयोग करना शुभ माना जाता है. जरूरतमंद लोगों को हरी मूंग, हरी सब्जियां या स्टेशनरी दान करना अच्छा माना जाता है. बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी वस्तुएं दान करने से भी सकारात्मक फल मिलते हैं. इस दिन झूठ बोलने, वाद-विवाद और क्रोध से बचना चाहिए. शांत मन से किया गया हर कार्य शुभ फल देता है.

क्या न करें
इस दिन मांसाहार और नशे से दूरी रखें. किसी का अपमान न करें और गलत शब्दों का प्रयोग न करें. मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत का प्रभाव कमजोर हो सकता है.
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https://hindi.news18.com/news/dharm/poush-onth-budh-pradosh-vrat-2025-know-about-puja-vidhi-and-significance-ws-e-9969522.html

















