Chavundi Daiv Karnataka : सुर्खियों की दुनिया में अक्सर एक बयान, एक मंच या एक परफॉर्मेंस कहानी का रुख बदल देती है. इस बार चर्चा का केंद्र बने हैं अभिनेता रणवीर सिंह, जिन पर कर्नाटक की पवित्र चावुंडी दैव परंपरा के अपमान का आरोप लगा है. मामला सिर्फ एक कलाकार तक सीमित नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संवेदनशील सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है. तटीय कर्नाटक में चावुंडी दैव को देवी-शक्ति के रूप में पूजा जाता है, और यहां उनकी मान्यताएं रोजमर्रा के जीवन से गहराई से जुड़ी हैं. ऐसे में किसी भी सार्वजनिक मंच पर की गई प्रस्तुति को लोग सिर्फ कला नहीं, अपनी श्रद्धा से जोड़कर देखते हैं. यही वजह है कि यह विवाद तेजी से कानूनी और सामाजिक बहस में बदल गया. सवाल उठ रहे हैं चावुंडी दैव कौन हैं, उनकी मान्यताएं क्या हैं, और आखिर यह मामला इतना गंभीर क्यों हो गया?
रणवीर सिंह पर क्या है आरोप?
बेंगलुरु के वकील प्रशांत मेथल ने शिकायत दर्ज कराई है कि रणवीर सिंह की एक परफॉर्मेंस ने तटीय कर्नाटक की बेहद पवित्र चावुंडी दैव परंपरा का अपमान किया. शिकायत के अनुसार, इससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 299 और 302 के तहत मामला दर्ज किया है.
चावुंडी दैव और मां चामुंडेश्वरी का धार्मिक महत्व
51 शक्तिपीठों में एक
कर्नाटक के मैसूर से करीब 13 किलोमीटर दूर चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित मां चामुंडेश्वरी मंदिर 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है. मान्यता है कि यहां माता सती के बाल गिरे थे. देवी को मां दुर्गा का ही स्वरूप माना जाता है और स्थानीय लोग उन्हें अपने शहर की संरक्षिका देवी मानते हैं.
चामुंडेश्वरी मंदिर से जुड़ी कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर एक शक्तिशाली असुर था. उसने ब्रह्मा जी की कठिन तपस्या की और वरदान पाया कि उसे कोई पुरुष या देवता नहीं मार सकेगा, केवल एक स्त्री ही उसका वध कर पाएगी. इस वरदान के बाद महिषासुर को अपनी शक्ति पर बहुत घमंड हो गया. उसने देवताओं, ऋषियों और आम लोगों पर अत्याचार शुरू कर दिए. चारों ओर भय और अशांति फैल गई.
महिषासुर के बढ़ते अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता एक साथ एकत्र हुए और उन्होंने देवी शक्ति की आराधना की. देवताओं की प्रार्थना से प्रसन्न होकर देवी भगवती प्रकट हुईं. उन्होंने देवताओं को भरोसा दिलाया कि वह महिषासुर के आतंक से सभी को मुक्त करेंगी.
इसके बाद देवी और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ. यह युद्ध कई दिनों तक चला. देवी ने महिषासुर की पूरी असुरी सेना का नाश कर दिया. अंत में देवी ने महिषासुर का सिर काटकर उसका अंत कर दिया. महिषासुर का वध करने के कारण देवी के इस स्वरूप को चामुंडा कहा गया. जिस स्थान पर यह युद्ध हुआ, वही चामुंडी पहाड़ी के नाम से प्रसिद्ध हुआ और बाद में यहां चामुंडेश्वरी मंदिर की स्थापना की गई.
मंदिर की वास्तुकला और परंपराएं
यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है. सात मंजिला यह मंदिर करीब 40 मीटर ऊंचा है. गर्भगृह में देवी की प्रतिमा शुद्ध सोने की बताई जाती है. मंदिर के पीछे महाबलेश्वर को समर्पित प्राचीन शिव मंदिर भी है. मैसूर दशहरे में देवी की प्रतिकृति को राजपालकी में विराजमान किया जाना यहां की अनोखी परंपरा है.
आस्था और आधुनिक विवाद
स्थानीय लोगों का मानना है कि मां चामुंडा की कृपा से मैसूर ने सदियों में प्रगति की. ऐसे में किसी भी सार्वजनिक प्रस्तुति को देवी या दैव परंपरा से जोड़कर देखना स्वाभाविक है. यही कारण है कि यह विवाद केवल कानूनी नहीं, भावनात्मक भी बन गया है.
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https://hindi.news18.com/news/dharm/who-is-chavundi-daiv-karnataka-ranveer-singh-controversy-know-the-significance-10117736.html

















