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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेले प्रशासन के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस मौके पर बागेश्वर धाम के आचार्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि दोनों सनातनी है और समझौता कर लेना चाहिए. वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है.
प्रयागराज माघ मेसे में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेले प्रशासन के बीच चल रहा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. इस मामले में रामदेव से लेकर अनिरुद्ध आचार्य तक सभी ने बयान दिए हैं. अब बागेश्वर धाम के आचार्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान भी सामने आया है. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कोटा में रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र में श्रीराम की कथा का वाचन किया. उन्होंने माघ में मेले में प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य को समझौता करने की सलाह दी. साथ ही मंच से उन्होंने गौसेवा के लिए युवाओं को प्रेरित किया और केंद्र सरकार से भी अपील की कि वे गाय को राष्ट्र माता घोषित करें. आइए जानते हैं पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने और क्या क्या कहा…
संगम घाट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य और अधिकारियों के बीच हुई नोकझोंक के बारे में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि मेरे पास इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है और मैं हर बात की पुष्टि नहीं कर सकता. मैंने सोशल मीडिया या अन्य मीडिया पर जो कुछ भी देखा है, उसके आधार पर मैं कहूंगा कि सनातन धर्म का उपहास नहीं किया जाना चाहिए. दोनों पक्ष अपने हैं, दोनों सनातनी ही हैं और मेरा मानना है कि दोनों पक्षों को बैठकर समझौता कर लेना चाहिए.
धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि कोई ऐसा कदम उठाना चाहिए, जिससे सनातन धर्म का मजाक बने. इस मामले में अब तक जो हास-परिहास हो रहा है, वह किसी भी हिसाब से सही नहीं है और इस मामले में किसी को भी लाभ नहीं होने वाला. सनातन धर्म पहले से ही कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है और हम सभी को ऐसे आंतरिक विवादों से बचना बेहद जरूरी है.
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कथा का उद्देश्य बताते हुए पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि गाय के प्रति गहरी श्रद्धा और सम्मान है और आशा है कि प्रत्येक घर गाय की देखभाल करेगा. केंद्र सरकार से यह भी आग्रह किया जाता है कि वह गाय को राष्ट्र माता घोषित करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक घर में गायों की देखभाल की जाए. इन्हीं उद्देश्य के साथ आज की कथा की गई है. उन्होंने आगे बताया कि कथा में खास बात ये है कि इस बार कथा में आरती का सौभाग्य 20 गरीब परिवारों को मिलेगा. अब गरीब कौन है, इसका पता लगाने के लिए हमने पंडितों की कमेटी आयोजित की है. इससे गरीबी और अमीरी का भेद कम होगा.
बता दें कि 17 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज मेघा मेला में संगम घाट पर स्नान करने पहुंचे थे. पूरे लाव-लश्कर के साथ वह अपनी पालकी पर आए थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा. इसी बात पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला व्यवस्था में जुटे कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था. बाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है. विवाद उस समय और बढ़ा, जब अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठ गए.
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https://hindi.news18.com/photogallery/dharm/dhirendra-krishna-shastri-commented-on-shankaracharya-swami-avimukteshwaranand-saraswati-controversy-at-magh-mela-ws-kl-10103705.html
