Home Astrology Guru Pradosh Vrat Katha In hindi | गुरु प्रदोष व्रत कथा

Guru Pradosh Vrat Katha In hindi | गुरु प्रदोष व्रत कथा

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Guru Pradosh Vrat Katha: साल 2026 के पहले दिन प्रदोष तिथि का व्रत किया जाएगा. चूंकि यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है इसलिए इस व्रत को गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा. गुरुवार को यह कथा सुनने-सुनाने से भगवान शिव और गुरु की कृपा प्राप्त होती है, जो जीवन में सही मार्गदर्शन देती है. यहां पढ़ें गुरु प्रदोष व्रत कथा…

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प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने व सुनने से हर कष्ट होगा दूर, शिवजी देंगे आशीर्वाद

Guru Pradosh Vrat Katha: प्रदोष व्रत हर मास कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को आता है, पर जब यह गुरुवार को पड़े तो इसे गुरु प्रदोष कहते हैं. प्रदोष व्रत का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है. प्रदोष व्रत की पूजा सुबह और प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है. भगवान शिव की पूजा अर्चना करने के बाद प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करने का विशेष महत्व है. गुरु प्रदोष व्रत की कथा सुनने व पढ़ने मात्र से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और ग्रह-नक्षत्र का भी शुभ प्रभाव मिलता है. यहां पढ़ें गुरु प्रदोष व्रत कथा…

गुरु प्रदोष व्रत कथा | Guru Pradosh Vrat Katha In Hindi

एक बार देवराज इंद्र और वृत्रासुर की सेना के बीच घनघोर युद्ध हुआ था. देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला. यह देख वृत्रासुर अत्यन्त क्रोधित हो स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ. आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण कर लिया. सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे. बृहस्पति महाराज बोले- पहले मैं तुम्हे वृत्रासुर का वास्तविक परिचय दे दूं.

वृत्रासुर बड़ा तपस्वी और कर्मनिष्ठ है. उसने गन्धमादन पर्वत पर घोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया. पूर्व समय में वह चित्ररथ नाम का राजा था. एक बार वह अपने विमान से कैलाश पर्वत चला गया. वहां शिवजी के वाम अंग में माता पार्वती को विराजमान देख वह उपहास पूर्वक बोला- हे प्रभो! मोह-माया में फंसे होने के कारण हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं. लेकिन देवलोक में ऐसा दृष्टिगोचर नहीं हुआ कि स्त्री आलिंगनबद्ध हो सभा में बैठे.

चित्ररथ के यह वचन सुन सर्वव्यापी शिव शंकर हंसकर बोले- हे राजन! मेरा व्यावहारिक दृष्टिकोण पृथक है. मैंने मृत्युदाता कालकूट महाविष का पान किया है, फिर भी तुम साधारण जन की भांति मेरा उपहास उड़ाते हो!

माता पार्वती क्रोधित हो चित्ररथ से संबोधित हुई- अरे दुष्ट! तूने सर्वव्यापी महेश्‍वर के साथ ही मेरा भी उपहास उड़ाया है. अतएव मैं तुझे वह शिक्षा दूंगी कि फिर तू ऐसे संतों के उपहास का दुस्साहस नहीं करेगा, अब तू दैत्य स्वरूप धारण कर विमान से नीचे गिर, मैं तुझे शाप देती हूं. जगदम्बा भवानी के अभिशाप से चित्ररथ राक्षस योनि को प्राप्त हो गया और त्वष्टा नामक ऋषि के श्रेष्ठ तप से उत्पन्न हो वृत्रासुर बना.

गुरुदेव बृहस्पति आगे बोले- वृत्तासुर बाल्यकाल से ही शिव भक्त रहा है. अतः हे देवराज इंद्र तुम बृहस्पति प्रदोष व्रत कर भगवान महादेव को प्रसन्न करो. देवराज ने गुरुदेव की आज्ञा का पालन कर बृहस्पति प्रदोष व्रत किया. गुरु प्रदोष व्रत के प्रताप से इंद्र ने शीघ्र ही वृत्रासुर पर विजय प्राप्त कर ली और देवलोक में शांति छा गई.
बोले भगवान शिव की जय, माता पार्वती की जय

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

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प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने व सुनने से हर कष्ट होगा दूर, शिवजी देंगे आशीर्वाद


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