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jagannath puri mandir miracles | secret of the four gates of Jagannath Puri temple | जगन्नाथ पुरी मंदिर के चार द्वार, चार युग से है इनका संबंध


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Jagannath Puri Mandir Miracles: जगन्नाथ मंदिर के बारे में कौन नहीं जानता, 7वीं सदी में निर्मित में इस मंदिर में हर रोज कई चमत्कार देखने को मिल जाते हैं. आप पुरी में किसी भी स्थान से मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देख सकेंगे और वह आपको सदा सामने ही लगा दिखेगा. आइए जानते मंदिर के चार मुख्य द्वार के रहस्यों के बारे में….

जगन्नाथ मंदिर के चार द्वार, चार युग से है इनका संबंध, जानें द्वार का रहस्य

Jagannath Puri Mandir Miracles: ओडिशा का जगन्नाथ पुरी मंदिर भक्ति और भव्यता की एक अनोखी मिसाल है. जगन्नाथ जी को कलियुग का भगवान कहा जाता है और उनके मंदिर से जुड़ी बहुत सी रहस्यमयी और अद्भुत बातें हैं जो हर किसी को हैरान कर देती हैं. मंदिर के चारों द्वारों को लेकर भी कुछ अनोखी मान्यताएं हैं. कहा जाता है कि जगन्नाथ पुरी मंदिर के चारों द्वार सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग को दर्शाते हैं. पुरी का जगन्नाथ चारधाम में से एक है और यहां भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं. जगन्नाथ धाम को पुराणों में पृथ्वी का बैकुंठ धाम कहा जाता है. यह दुनिया का सबसे ऊंचा और भव्य मंदिर है लेकिन इस मंदिर की मुख्य गुंबद की छाया किसी भी समय अदृश्य रहती है. आइए जानते हैं मंदिर के चार द्वार के बारे में…

जगन्नाथ मंदिर का पहला द्वार
सबसे पहले बात करते हैं पूर्व दिशा के द्वार की, जिसे सिंह द्वार कहा जाता है. यह मंदिर का मुख्य द्वार है और इसे मोक्ष का प्रतीक माना गया है. जब कोई भक्त इस द्वार से मंदिर में प्रवेश करता है, तो ऐसा कहा जाता है कि उसकी आत्मा पवित्र हो जाती है. इसी द्वार के सामने प्रसिद्ध अरुण स्तंभ स्थित है, जिस पर भगवान सूर्य के सारथी अरुण देव की मूर्ति है. मान्यता है कि इस स्तंभ को देखने मात्र से ही शुभ फल प्राप्त होते हैं.

जगन्नाथ मंदिर का दूसरा द्वार
अब आते हैं दक्षिण दिशा के द्वार पर, जिसे अश्व द्वार या विजय द्वार कहा जाता है. प्राचीन काल में जब राजा या योद्धा युद्ध के लिए जाते थे, तो वे इसी द्वार से होकर मंदिर में प्रवेश करते थे और भगवान जगन्नाथ से विजय की कामना करते थे. इसीलिए इसे विजय का प्रतीक माना गया है. यह द्वार शक्ति, साहस और सफलता का प्रतीक है.

जगन्नाथ मंदिर का तीसरा द्वार
तीसरा द्वार है पश्चिम दिशा में स्थित हस्ति द्वार, यानी हाथी द्वार. यह द्वार समृद्धि और सुख का प्रतीक है. इस द्वार पर भगवान गणेश की मूर्ति विराजमान है, जो विघ्नहर्ता और समृद्धि के देवता माने जाते हैं. भक्त मानते हैं कि इस द्वार से प्रवेश करने पर जीवन में धन, ज्ञान और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

जगन्नाथ मंदिर का चौथा द्वार
अंत में आता है उत्तर दिशा का व्याघ्र द्वार, जिसे बाघ द्वार भी कहा जाता है. यह द्वार धर्म और संरक्षण का प्रतीक है. इसे भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित माना जाता है, जो अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक हैं. यह द्वार हमें सिखाता है कि धर्म की रक्षा करना ही सच्चे जीवन का उद्देश्य है. इन चारों द्वारों के माध्यम से जगन्नाथ मंदिर जीवन के चार सिद्धांतों मोक्ष, विजय, समृद्धि और धर्म का संदेश भी देता है. यही कारण है कि जगन्नाथ मंदिर केवल एक तीर्थस्थान नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का प्रतीक माना जाता है.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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जगन्नाथ मंदिर के चार द्वार, चार युग से है इनका संबंध, जानें द्वार का रहस्य


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