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Lohri 2025: लोहड़ी पर क्यों सुनी जाती है दुल्ला भट्टी की कहानी? क्‍या होता है महत्‍व, पंडितजी से जानें सच्चाई

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Lohri 2025 dulla-bhatti Kahani: साल 2025 के जनवरी माह में एक के बाद एक कई त्योहार पड़ रहे हैं. लोहड़ी, पोंगल व मकर संक्रांति इनमें से प्रमुख पर्व हैं. सबसे पहले 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. इसके ठीक एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है. लोहड़ी हर वर्ष पौष माह के अंतिम दिन उत्साह व उमंग के साथ मनाया जाता है. इसी दिन से माघ मास की शुरुआत भी हो जाती है. लोहड़ी सिख समुदाय का प्रमुख त्योहार है. इस दिन लोग दुल्ला-भट्टी की कहानी सुनते हैं और रात में आग जलाई जाती है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आखिर लोहड़ी पर दुल्ला-भट्टी की कहानी क्यों सुनते हैं? क्या है दुल्ला-भट्टी सुनने का महत्व? इस बारे में Bharat.one को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

2025 में कब मनाया जाएगा लोहड़ी का पर्व?

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है. सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में 14 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 44 मिनट में प्रवेश करेंगे. ऐसे में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी दिन मंगलवार को मनाया जाएगा. वहीं, मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है इसलिए लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी दिन सोमवार को मनाया जाएगा. यहां उदया तिथि मान्य नहीं होगी.

लोहड़ी पर पूजा का महत्व

मान्यताओं के अनुसार, लोहड़ी की रात साल की सबसे लंबी रात होती है. इसके बाद दिन बड़े होने लगते हैं. मौसम अनुकूल होने लगता है, जो फसलों के लिए उत्तम होता है. इसलिए लोहड़ी पर किसान नई फसल की बुआई करना शुरू कर देते हैं. लोहड़ी पर पूजा का विशेष विधान है. लोहड़ी पर पश्चिम दिशा में मां आदिशक्ति की प्रतिमा स्थापित कर सरसों के तेल का दीपक जलाएं. प्रतिमा पर सिंदूर का तिलक लगाएं और तिल से बने लड्डू अर्पित करें.

लोहड़ी पर दुल्ला-भट्टी की कहानी का महत्व

लोहड़ी के पीछे एक कथा प्रचलित है. दरअसल दुल्ला भट्टी नाम के चरित्र का रोचक ऐतिहासिक कथा से जुड़ा है. ऐसा कहा जाता है कि पुराने समय में सुंदर एवं मुंदर नाम की दो अनाथ लड़कियां थीं. उनके चाचा ने राज्य के शक्तिशाली सूबेदार का कृपापात्र बनने के लिए उन बच्चियों को उसको सौंप दिया था. उसी राज्य में दुल्ला भट्टी नाम का एक नामी डाकू था, जो अमीरों व घूसखोरों से धन लूटकर गरीबों की मदद किया करता था, जब उसको यह बात पता चली तो उसने दोनों लड़कियों को मुक्त करा कर दो अच्छे लड़के देखकर खुद ही पिता के रूप में उन दोनों का कन्यादान किया. इसके लिए उसने आसपास से लकड़ी एकत्रित करके आग जलाई और फल मीठे की जगह रेवड़ी और मक्के जैसी चीजों का ही इस्तेमाल किया गया. उसी समय से दुल्ला भट्टी की याद में यह त्योहार मनाया जाने लगा. ये नाम आज भी लोहड़ी के लोक गीतों में लिया जाता है और वो पंजाब में नायक की तरह याद किया जाता है.


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https://hindi.news18.com/news/dharm/lohri-2025-celebration-rituals-significance-why-listen-story-dulla-bhatti-on-occasion-of-lohri-know-importance-from-pandit-ji-8900299.html

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