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Mahashivratri 2025 Bhadra: महाशिवरात्रि पर सुबह से रात तक भद्रा, फिर कब करेंगे महादेव की पूजा? जानें क्या कहते हैं पंडित जी

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Mahashivratri 2025 Bhadra: इस साल महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया है. शास्त्रों के अनुसार, भद्रा को अशुभ माना जाता है और उस समय में कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं. ऐसे में सवाल यह है कि महाशिवरात्रि पर भद्रा लग र…और पढ़ें

महाशिवरात्रि पर सुबह से रात तक भद्रा, फिर कब करेंगे महादेव की पूजा? जानें

महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया 2025. (PTI)

हाइलाइट्स

  • महाशिवरात्रि 2025 पर भद्रा का साया रहेगा.
  • शास्त्रों के अनुसार, भद्रा अशुभ मानी जाती.
  • महाशिवरात्रि की निशिता पूजा रात 12:09 से 12:59 तक है.

महाशिवरात्रि का पावन पर्व देवों के देव महादेव की पूजा और आराधना का दिन है. इस अवसर पर शिव भक्त व्रत रखते हैं और विधि विधान से भोलेनाथ की पूजा करते हैं. शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ लग जाती है. इस साल महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया है. शास्त्रों के अनुसार, भद्रा को अशुभ माना जाता है और उस समय में कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं. यदि आप भद्रा में शुभ कार्य करते हैं तो उसमें कई प्रकार की विघ्न और बाधाएं आती हैं. वह कार्य सफल नहीं होता है. ऐसे में सवाल यह है कि महाशिवरात्रि पर भद्रा लग रही है तो पूजा कब करेंगे? इस बारे में बता रहे हैं तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव.

कब है महाशिवरात्रि 2025
इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी दिन बुधवार को है. महाशिवरात्रि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को है. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 08 मिनट से प्रारंभ होगी और यह तिथि 27 फरवरी को सुबह 08 बजकर 54 मिनट तक मान्य है.

महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया 2025
इस साल की महाशिवरात्रि पर भद्रा है. उस दिन भद्रा का प्रारंभ सुबह में 11 बजकर 08 मिनट से हो रहा है यानि महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि के प्रारंभ के साथ ही भद्रा लग रही है. भद्रा रात में 10 बजकर 05 मिनट तक रहेगी. इस भद्रा का वास पाताल लोक में है. शुभ कार्यों में पाताल और पृथ्वी लोक की भद्रा को अनदेखा नहीं करते हैं.

भद्रा में कैसे होगी महाशिवरात्रि पूजा?
ज्योतिषाचार्य डॉ. भार्गव का कहना है कि भद्रा शनि देव की बहन और सूर्य देव की पुत्री हैं. भद्रा को कष्ट देने वाला माना जाता है. इसकी गणना मुहूर्त में की जाती है. ब्रह्म देव ने कहा था कि कोई भद्रा काल में शुभ कार्य करे तो भद्रा बाधा उत्पन्न करेगी. लेकिन पाताल लोक या स्वर्ग लोक की भद्रा को अशुभ फलदायी नहीं माना जाता है. महाशिवरात्रि पर पाताल की भद्रा है, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है. आप महाशिवरात्रि पर अपने शुभ कार्य बिना किसी डर के प्रारंभ कर सकते हैं.

रही बात भद्रा में महाशिवरात्रि की पूजा का तो आपको बता दें कि भद्राकाल में आप किसी भी भगवान की पूजा कर सकते हैं. इसकी मनाही नहीं क्योंकि वे भद्रा, राहुकाल आदि से परे होते हैं. वैसे भी देवों के देव महादेव तो स्वयं महाकाल है, जिनमें भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों ही समाहित हैं, वे त्रिकालदर्शी हैं. ऐसे में आप महाशिवरात्रि की पूजा ब्रह्म मुहूर्त से ही कर सकते हैं और यह पूरे दिन होगा. शिव पूजा के लिए मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं पड़ती है.

महाशिवरात्रि 2025 निशिता पूजा मुहूर्त
महाशिवरात्रि को निशिता मुहूर्त में मंत्रों की सिद्धियों के लिए पूजा करते हैं. महाशिवरात्रि की निशिता पूजा मुहूर्त देर रात 12 बजकर 09 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक है.

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महाशिवरात्रि पर सुबह से रात तक भद्रा, फिर कब करेंगे महादेव की पूजा? जानें


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