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Mangalam Bhagwan Vishnu Mantra Benefits and Importance। मंगलम भगवान विष्णु मंत्र का अर्थ और महत्व


Mangalam Bhagwan Vishnu Mantra: घर में कोई नया काम शुरू होना है शादी की तैयारी, गृह प्रवेश, या फिर किसी नए प्रोजेक्ट की पहली फाइल. ऐसे मौकों पर अक्सर एक संस्कृत श्लोक अपने आप जुबान पर आ जाता है “मंगलम् भगवान विष्णुः…”. यह सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही एक आस्था है, जो आज भी उतनी ही जीवित और प्रासंगिक है. यह मंत्र न तो किसी एक वर्ग तक सीमित है और न ही किसी खास समय तक. कारण साफ है लोग मानते हैं कि जब शुरुआत मंगलमय हो, तो रास्ते खुद-ब-खुद आसान हो जाते हैं. यही वजह है कि मंगलम भगवान विष्णु मंत्र आज भी धार्मिक आस्था, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का मजबूत प्रतीक बना हुआ है. असल में इसका अर्थ और महत्व क्या है आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.

क्या है मंगलम भगवान विष्णु मंत्र
यह प्रसिद्ध संस्कृत मंत्र भगवान विष्णु की स्तुति में रचा गया है, जिसमें उन्हें मंगल, कल्याण और संरक्षण का स्रोत माना गया है.
“मंगलम् भगवान विष्णुः, मंगलम् गरुणध्वजः…” इन पंक्तियों में विष्णु को न केवल सृष्टि का पालनकर्ता बताया गया है, बल्कि जीवन के हर कार्य को शुभ बनाने वाला भी माना गया है. धार्मिक ग्रंथों में इसे मंगलाचरण कहा गया है, यानी किसी भी शुभ कार्य से पहले बोला जाने वाला मंत्र.

मंगलम भगवान विष्णु, मंगलम गरुड़ ध्वजा” प्रसिद्ध विष्णु मंत्र का प्रारंभिक भाग है,
जिसका अर्थ है:
“सर्वव्यापी भगवान विष्णु मंगलकारी हैं, और गरुड़ को अपने ध्वज (पताका) पर धारण करने वाले (भगवान विष्णु) भी मंगलकारी हैं”। यह श्लोक किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में भगवान विष्णु से कल्याण और समृद्धि की प्रार्थना करने के लिए उपयोग किया जाता है।

विस्तार अर्थ और महत्व:
मूल मंत्र: मंगलम भगवान विष्णुः, मंगलम गरुड़ध्वजः। मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
मंगलम भगवान विष्णु: भगवान विष्णु स्वयं मंगल (कल्याण/शुभ) स्वरूप हैं.
मंगलम गरुड़ ध्वज: जिनके ध्वज में गरुड़ अंकित हैं, वे विष्णु भी मंगलकारी हैं.
मंगलम पुंडरीकाक्ष: कमल के समान नेत्रों वाले भगवान विष्णु (पुंडरीकाक्ष) का हर कार्य मंगलमय है.
मंगलाय तनो हरि: सर्व-कल्याण करने वाले हरि (विष्णु) सभी का कल्याण (मंगल) करें.

क्यों हर शुभ काम से पहले होता है इसका जाप
परंपरा और मनोविज्ञान का मेल
भारत में किसी भी पूजा, विवाह या संस्कार की शुरुआत इस मंत्र से होना आम बात है. बुजुर्ग मानते हैं कि यह मंत्र बाधाओं को दूर करता है. वहीं, मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखें तो यह मंत्र मन को स्थिर करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है. जब मन शांत होता है, तो फैसले भी बेहतर होते हैं.

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वास्तविक जीवन से जुड़ा विश्वास
आज भी कई लोग नया बिजनेस शुरू करने, परीक्षा देने या इंटरव्यू से पहले इस मंत्र का जाप करते हैं. उनका मानना है कि इससे नकारात्मक सोच कम होती है और फोकस बना रहता है.

मंत्र जाप की सही विधि
समय और वातावरण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4 से 6 बजे का समय सबसे उपयुक्त माना गया है. साफ-सुथरे वातावरण में, भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर मंत्र जाप किया जाता है.

संख्या और अनुशासन
108 बार जाप को आदर्श माना गया है. तुलसी की माला का उपयोग करने से एकाग्रता बनी रहती है. हालांकि, कई लोग कम समय में भी श्रद्धा के साथ इसका उच्चारण करते हैं.

आध्यात्मिक और व्यावहारिक लाभ
सकारात्मक ऊर्जा और शांति
नियमित जाप से मन में स्थिरता आती है. लोग बताते हैं कि इससे दिन भर एक अलग तरह की शांति महसूस होती है.

कर्म और आत्मविश्वास
धार्मिक विश्वास के अनुसार, यह मंत्र कर्म को मजबूत करता है और पिछले नकारात्मक प्रभावों को कम करता है. व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो, यह आत्मबल को बढ़ाता है और रिश्तों में संतुलन लाने में मदद करता है.

भगवान विष्णु का व्यापक महत्व
भगवान विष्णु को ‘नारायण’ और ‘हरि’ भी कहा जाता है. वे त्रिदेवों में पालनकर्ता हैं और दशावतारों के माध्यम से धर्म की रक्षा करते हैं. राम और कृष्ण जैसे अवतार आज भी समाज को नैतिक दिशा देते हैं. यही कारण है कि विष्णु मंत्रों का स्थान हिंदू धर्म में विशेष माना गया है.

आज के दौर में मंत्र की प्रासंगिकता
डिजिटल युग में भी लोग आध्यात्मिक सहारे तलाशते हैं. मोबाइल ऐप्स, यूट्यूब और पॉडकास्ट पर विष्णु मंत्रों की लोकप्रियता यह दिखाती है कि आस्था ने सिर्फ रूप बदला है, महत्व नहीं. मंगलम भगवान विष्णु मंत्र आज भी नई शुरुआत का भरोसेमंद आधार बना हुआ है.


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https://hindi.news18.com/news/dharm/mangalam-bhagwan-vishnu-mantra-benefits-importance-ws-e-10149627.html

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