Countless Shivlings: भारत को मंदिरों और चमत्कारों की धरती कहा जाता है. यहां हर राज्य, हर शहर और हर गांव में कोई न कोई ऐसा धार्मिक स्थान मिल जाता है, जिसके साथ कोई रहस्य या मान्यता जुड़ी होती है. कुछ मंदिर अपनी अनोखी बनावट के लिए जाने जाते हैं, कुछ अपनी कहानी के लिए और कुछ ऐसे भी हैं जो आज तक लोगों के लिए पहेली बने हुए हैं. ऐसा ही एक रहस्यमयी शिव मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में मौजूद है, जहां भगवान शिव के शिवलिंगों की संख्या आज तक कोई भी ठीक-ठीक नहीं गिन पाया. आमतौर पर हम सभी ने यही देखा और सुना है कि एक मंदिर में एक ही शिवलिंग होता है. कहीं-कहीं दो या तीन शिवलिंग भी मिल जाते हैं, लेकिन इस मंदिर में सैकड़ों शिवलिंग हैं और सबसे हैरानी की बात यह है कि हर बार गिनने पर इनकी संख्या बदल जाती है. कभी 243, कभी 283 और कभी इससे भी ज्यादा. यही वजह है कि यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि रहस्य और चमत्कार का प्रतीक भी बन चुका है. इस मंदिर को भगवान शिव का दरबार कहा जाता है. यहां आने वाले भक्त सिर्फ दर्शन करने नहीं, बल्कि इस अनोखे अनुभव को महसूस करने आते हैं. पुजारी हों या श्रद्धालु, सभी मानते हैं कि यहां जो कुछ भी होता है, वह आम नहीं बल्कि शिव की लीला है. यही रहस्य इस मंदिर को बाकी शिव मंदिरों से अलग बनाता है.
शिव कचहरी मंदिर का इतिहास
इस अद्भुत मंदिर की स्थापना साल 1865 में नेपाल के राजा राणा सेनापति पद्म जंग बहादुर ने करवाई थी. उस समय इस मंदिर को एक खास उद्देश्य के साथ बनवाया गया था. मंदिर में भगवान शिव के अलग-अलग रूपों के शिवलिंग स्थापित किए गए, ताकि यह स्थान शिव के पूर्ण स्वरूप को दर्शा सके. समय के साथ यह मंदिर स्थानीय लोगों के बीच ही नहीं, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के बीच भी प्रसिद्ध हो गया.
हर बार बदल जाती है शिवलिंगों की संख्या
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां मौजूद शिवलिंगों की संख्या कभी एक जैसी नहीं रहती. कई लोगों ने कोशिश की कि सभी शिवलिंगों को गिनकर उनकी सही संख्या पता लगाई जाए, लेकिन हर बार गिनती अलग निकलती है. कुछ लोग मानते हैं कि यह आंखों का भ्रम हो सकता है, जबकि पुजारी और श्रद्धालु इसे भगवान शिव का चमत्कार मानते हैं.
यहां ऐसा भी देखा गया है कि एक ही व्यक्ति जब दो बार गिनता है, तो दोनों बार संख्या अलग आती है. यही वजह है कि आज तक कोई भी पूरे भरोसे के साथ यह नहीं कह सका कि इस मंदिर में कुल कितने शिवलिंग हैं.

भगवान शिव के सभी रूपों का निवास
शिव कचहरी मंदिर में भगवान शिव के कई रूपों के शिवलिंग मौजूद हैं. यहां चंदेश्वर, सिद्धेश्वर, नागेश्वर और शहीद भगवान जैसे अलग-अलग नामों से जाने जाने वाले शिवलिंग स्थापित हैं. भक्तों का मानना है कि एक ही स्थान पर शिव के इतने रूपों के दर्शन होना बहुत दुर्लभ है. यही कारण है कि इस मंदिर को शिव का दरबार कहा जाता है.
भगवान राम से जुड़ी पवित्र कथा
इस मंदिर से जुड़ी कहानी इसे और भी खास बना देती है. मान्यता है कि जब भगवान राम लंका विजय के बाद अयोध्या लौट रहे थे, तब रावण वध के कारण उन पर ब्रह्महत्या का दोष माना गया. इस दोष से मुक्ति पाने के लिए महर्षि भारद्वाज ने उन्हें पृथ्वी पर एक करोड़ शिवलिंग स्थापित कर पूजा करने की सलाह दी.
कहा जाता है कि प्रयागराज के शिवकुटी क्षेत्र में भगवान राम ने कोटेश्वर महादेव की स्थापना की थी. यही स्थान आगे चलकर शिव कचहरी मंदिर के रूप में जाना गया. भक्तों का विश्वास है कि यहां की गई पूजा से बड़े से बड़ा दोष भी कट सकता है.
आज भी आस्था और चमत्कार का केंद्र
आज भी शिव कचहरी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है. सावन के महीने में यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. लोग यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मानते हैं कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर पूरी होती है. मंदिर का वातावरण अपने आप में शांति और ऊर्जा से भरा हुआ महसूस होता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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