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Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज विश्वभर में बेहद प्रसिद्ध हैं और राधा रानी के बहुत बड़े भक्त हैं साथ ही प्रवचन भी देते हैं. उन्हें आम आदमी से लेकर सेलिब्रिटीज तक फॉलो करते हैं लेकिन उनके ही बड़े भाई उ…और पढ़ें
प्रेमानंद जी महाराज के बड़े भाई ने कही बड़ी बात!
हाइलाइट्स
- प्रेमानंद महाराज के भाई उनसे मिलने नहीं आते.
- धार्मिक कारणों से भाई ने मिलने से इंकार किया.
- भाई गृहस्थ जीवन की मर्यादाओं का पालन करते हैं.
Premanand Ji Maharaj: वृंदावन में स्थित प्रेमानंद जी महाराज, जिनका प्रभाव आज के समय में भक्तों और साधकों पर गहरा है, के बारे में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. उनके बड़े भाई ने यह कहा कि वे अपने छोटे भाई से मिलने का कोई इरादा नहीं रखते और इसके पीछे जो कारण बताया, वह कई लोगों के लिए हैरान करने वाला था. यह कारण एक धार्मिक और आत्मिक दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है, जिसे समझना जरूरी है.
क्या कहना है प्रेमानंद जी महाराज के बड़े भाई का?
प्रेमानंद जी महाराज के बड़े भाई का कहना है कि वह एक गृहस्थ हैं और उनका जीवन गृहस्थी के नियमों और मर्यादाओं के तहत चलता है. वह खुद को संत नहीं मानते, बल्कि एक सामान्य व्यक्ति की तरह अपना जीवन जीते हैं. उन्होंने यह बताया कि जब दो भाई एक-दूसरे के पास जाते हैं तो उनका मिलन एक सामाजिक और पारिवारिक दृष्टिकोण से सामान्य होता है, लेकिन यदि वह अपने छोटे भाई, जो एक संत हैं, से मिलते हैं तो यह एक धार्मिक समस्या उत्पन्न कर सकता है.
उनके अनुसार, अगर वह संत से अपने पैर छूआते हैं तो इससे एक बड़ा दोष लग सकता है, क्योंकि संतों से मिलते समय किसी गृहस्थ को अपने चरण स्पर्श नहीं कराने चाहिए. प्रेमानंद जी महाराज के साथ कई महात्मा भी उनके चरण स्पर्श करेंगे जिससे ये दोष कई गुना बढ़ जाएगा. केवल वही व्यक्ति उनके चरण छूने के योग्य होता है, जिसने जीवन में बहुत पुण्य अर्जित किया हो. ऐसे में, उनका मानना था कि उन्होंने इतने पुण्य नहीं कमाए हैं कि वह संत से अपने चरणों में प्रणाम कराएं.
प्रेमानंद महाराज के बड़े भाई का कहना था कि हर आश्रम और हर व्यक्ति का एक निर्धारित विधान होता है, जिसे पालन करना जरूरी है. गृहस्थ आश्रम में रहने वाले लोगों को अपनी मर्यादाओं का पालन करना चाहिए और संतों के साथ किसी भी प्रकार के संबंध स्थापित करते समय इन मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए.
यहां पर यह भी गौर करने वाली बात है कि उनके बड़े भाई का इरादा किसी प्रकार की ईगो या अवमानना का नहीं था. बल्कि, वह यह समझते हैं कि संतों के साथ शारीरिक संपर्क से बचना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक समस्या उत्पन्न न हो. उनके लिए यह एक आत्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण था, जिसमें वे अपने भाई के साथ संबंध रखते हुए भी अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करना चाहते थे.
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https://hindi.news18.com/news/dharm/why-does-premanand-maharajs-elder-brother-not-want-to-meet-him-kyon-maharaj-ji-ke-bade-bhai-unse-nahi-milte-9044320.html






