Premanand Ji Maharaj Quotes : जब कोई अपना अचानक दूरी बना लेता है, तो दिल सबसे पहले सवाल करता है क्या वो वापस आएगा? यही सवाल रातों की नींद छीन लेता है, मोबाइल बार-बार चेक करवाता है और मन को बेचैन रखता है. रिश्तों की इस उलझन में प्रेमानंद जी महाराज की बातें आज के समय में खास मायने रखती हैं. वे भावनाओं को दबाने या किसी को मनाने की जिद नहीं सिखाते, बल्कि खुद को मजबूत बनाने का रास्ता दिखाते हैं. उनका मानना है कि जब इंसान खुद के भीतर संतुलन और आत्मसम्मान पा लेता है, तो रिश्तों की दिशा अपने आप बदल जाती है. कई बार सामने वाला तभी लौटता है, जब उसे आपकी गैर-मौजूदगी और आपकी कीमत का एहसास होता है.
प्रेमानंद जी महाराज की रिश्तों पर दृष्टि
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि प्रेम किसी की मजबूरी नहीं होना चाहिए. अगर कोई चला गया है, तो उसके पीछे भागना आत्मसम्मान को कमजोर करता है. रिश्तों में सबसे जरूरी तीन बातें हैं Self-respect, Self-control और Self-focused life. ये तीनों मिलकर इंसान को भीतर से स्थिर बनाती हैं. आज के रिश्तों में अक्सर हम सामने वाले को केंद्र बना लेते हैं और खुद को भूल जाते हैं, यहीं से पीड़ा शुरू होती है.
टूटे रिश्ते में ताकत लौटाने वाले 6 जीवन मंत्र
1. मौन को अपना हथियार बनाएं
मौन को अक्सर कमजोरी समझ लिया जाता है, लेकिन प्रेमानंद जी महाराज इसे आत्मसंयम कहते हैं. जब आप हर दर्द को शब्द नहीं देते, तो सामने वाला आपकी प्रतिक्रिया न मिलने से असहज होता है. कई बार चुप्पी, लंबी बहस से ज्यादा असर छोड़ती है.
2. हर समय उपलब्ध रहना छोड़ें
हर कॉल उठाना, हर मैसेज का तुरंत जवाब देना आपकी अहमियत कम करता है. थोड़ी दूरी आत्मसम्मान की निशानी है. जब आप हमेशा उपलब्ध नहीं रहते, तब सामने वाला आपकी मौजूदगी की कीमत समझता है.
3. प्रतिक्रिया नहीं, स्थिरता चुनें
गुस्सा, रोना या ताने ये सब भावनात्मक प्रतिक्रियाएं आपको कमजोर बनाती हैं. एक शांत और स्थिर व्यक्ति को नियंत्रित करना मुश्किल होता है. प्रेमानंद जी महाराज मानते हैं कि असली शक्ति नियंत्रण में नहीं, संतुलन में है.
4. हर बात साझा करना जरूरी नहीं
आज के रिश्तों में ओवर-शेयरिंग आम हो गई है. हर भावना, हर डर सामने रख देने से इंसान मानसिक रूप से थक जाता है. थोड़ा रहस्य रिश्तों में सम्मान और आकर्षण दोनों बनाए रखता है.
5. आत्मसम्मान से समझौता न करें
भीख मांगकर मिला रिश्ता ज्यादा दिन नहीं टिकता. प्रेमानंद जी महाराज साफ कहते हैं सम्मान पहले आता है, प्रेम बाद में. अगर किसी रिश्ते में बार-बार खुद को छोटा करना पड़ रहा है, तो अकेलापन बेहतर है.
6. खुद पर ध्यान केंद्रित करें
अपने शरीर, मन और लक्ष्यों पर काम करना शुरू करें. जिम जाना, नई स्किल सीखना या अपने करियर पर फोकस करना ये सब आपको भीतर से मजबूत बनाते हैं. अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब इंसान खुद को संवार लेता है, तो वही व्यक्ति लौटने की पहल करता है.
रिश्तों का असली सबक
प्रेमानंद जी महाराज का संदेश सीधा है जो चला गया है, उसे जबरदस्ती रोकने की कोशिश मत करो. खुद को इतना मजबूत बना लो कि अगर वो लौटे भी, तो सम्मान के साथ लौटे. रिश्ते तभी टिकते हैं, जब दोनों बराबरी से जुड़े हों, मजबूरी से नहीं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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