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Sheetala Ashtami 2025 Date: 22 या 23 मार्च कब है शीतला अष्टमी या बसौड़ा, जानें सही तिथि, मुहूर्त और इन 4 बातों का रखें खास ध्यान

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Sheetala Ashtami 2025 Date And Time: शीतला अष्टमी के पर्व को बसौड़ा या बसोड़ा के नाम से भी जाना जाता है. बसौड़ा वाले दिन शीतला माता की पूजा अर्चना करने से सभी रोग व कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति और समृद…और पढ़ें

22 या 23 मार्च कब है शीतला अष्टमी या बसौड़ा, इन 4 बातों का रखें खास ध्यान

22 या 23 मार्च कब है शीतला अष्टमी या बसौड़ा

हाइलाइट्स

  • शीतला अष्टमी 2025: 22 मार्च को मनाई जाएगी.
  • पूजा मुहूर्त: 22 मार्च, सुबह 4:49 से 6:24 तक.
  • बसौड़ा पूजा में ठंडे खाने का भोग लगाया जाता है.

Sheetala Ashtami 2025: हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी के पर्व को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और यह पर्व हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. शीतला अष्टमी को बसौड़ा या बसोड़ा के नाम से भी जाना जाता है और यह पर्व मुख्यत: यूपी, एमपी, राजस्थान आदि उत्तर भारत के राज्यों में मनाया जाता है. बसौड़ा वाले दिन शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाते हैं और पूरा परिवार भी इस दिन बासी बोजन करता है क्योंकि इस दिन चुल्हा ना जलाने की परंपरा है. जिस तरह माता काली असुरों का अंत करती हैं, उसी तरह शीतला माता सभी रोग व कष्ट रूपी राक्षसों का अंत करती हैं. आइए जानते हैं शीतला माता का पर्व कब मनाया जाएगा और पूजा का क्या है मुहूर्त…

कब है बसौड़ा का पर्व?
अष्टमी तिथि का प्रारंभ – 22 मार्च दिन शनिवार, 4 बजकर 23 मिनट से
अष्टमी तिथि का समापन – 23 मार्च दिन रविवार, सुबह 5 बजकर 23 मिनट तक
उदया तिथि को देखते हुए जो लोग अष्टमी तिथि को शीतला माता की पूजा कर रहे हैं, वे 22 मार्च दिन शनिवार को पूजा अर्चना करें.

शीतला माता पूजा मुहूर्त – 22 मार्च, सुबह 4 बजकर 49 मिनट से 6 बजकर 24 मिनट तक

बसौड़ा का महत्व
शीतला माता की पूजा कुछ लोग सप्तमी तिथि को करते हैं तो कुछ अष्टमी तिथि को. मान्यता है कि शीतला अष्टमी का व्रत करने से चेचक, खसरा, चिकन पॉक्स, दाहज्वर आदि रोग खत्म हो जाते हैं और माता के आशीर्वाद से मन व शरीर के रोगों से शीतलता मिलती हैं, ऐसी धार्मिक मान्यताएं हैं. शीतला माता का भोग और घर के सदस्यों के लिए भोजन एक दिन पहले बनाकर रख लिया जाता है और बसौड़ा वाले दिन घर पर चूल्हा नहीं जलाया जाता. होली के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिलता है, ठंड पूरी तरह खत्म हो जाती है और गीष्म ऋतु का आगमन होता है.

बसौड़ा पूजा में इन 4 बातों का रखें ध्यान
1- शीतला माता की पूजा में ठंडे यानी बासी खाने का भोग लगाया जाता है.
2- शीतला माता की पूजा में धूप, कपूर, धूपबत्ती, दीपक नहीं जलाना चाहिए.
3– शीतला माता की पूजा में अग्नि का प्रयोग नहीं किया जाता.
4- शीतला माता की पूजा हमेशा सूर्योदय से पहले की जाती है.

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22 या 23 मार्च कब है शीतला अष्टमी या बसौड़ा, इन 4 बातों का रखें खास ध्यान


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