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Skanda Sashti Vrat 2025: स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय की कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर है. इस दिन उपवास, कार्तिकेय मंत्र-जप, सुब्रह्मण्य स्तोत्र पाठ और मंदिर में दीप-धूप अर्पण करने से जीवन की बाधाएं दूर होकर साहस, व…और पढ़ें

शुभ योग में स्कंद षष्ठी व्रत
दृक पंचांग के अनुसार, 12 सितंबर को पंचमी तिथि सुबह 9 बजकर 58 मिनट तक रहेगी, फिर उसके बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी. इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. इस दिन सूर्य देव सिंह राशि में रहेंगे और चंद्रमा शाम के 5 बजकर 30 मिनट तक मेष राशि में रहेंगे. इसके बाद वृषभ राशि में गोचर करेंगे. स्कंद षष्ठी के दिन रवि योग और हर्षण योग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है.
स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय की कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर है. इस दिन उपवास, कार्तिकेय मंत्र-जप, सुब्रह्मण्य स्तोत्र पाठ और मंदिर में दीप-धूप अर्पण करने से जीवन की बाधाएं दूर होकर साहस, विजय और संतान-सुख की प्राप्ति होती है. षष्ठी तिथि चिद्र तिथियों में आती है, अतः इस दिन व्रत व उपासना करने से बाधाएं दूर होती हैं. मंगल दोष, भूमि-संपत्ति विवाद और शारीरिक रोगों से मुक्ति के लिए स्कंद षष्ठी व्रत अत्यंत प्रभावी है.
इस तिथि को किया था तारकासुर का वध
स्कंद पुराण के अनुसार, शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन स्कंद षष्ठी मनाई जाती है. मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय ने इस दिन तारकासुर नाम के दैत्य का वध किया था, जिसके बाद इस तिथि को स्कंद षष्ठी के नाम से मनाया जाने लगा. इस जीत की खुशी में देवताओं ने स्कंद षष्ठी का उत्सव मनाया था. स्कंद पुराण के अनुसार, जो दंपति संतान सुख से वंचित हैं, उन्हें स्कंद षष्ठी का व्रत अवश्य करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है. शत्रुओं पर विजय, भय निवारण और साहस प्राप्त होता है.
स्कंद षष्ठी व्रत पूजा विधि
व्रत शुरू करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और आसन बिछाएं, फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उसके ऊपर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा को स्थापित करें. इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेश और नवग्रहों की पूजा करें और व्रत संकल्प लें. इसके बाद कार्तिकेय भगवान को वस्त्र, इत्र, चंपा के फूल, आभूषण, दीप-धूप और नैवेद्य अर्पित करें. भगवान कार्तिकेय का प्रिय पुष्प चंपा है, इस वजह से इस दिन को स्कंद षष्ठी, कांडा षष्ठी के साथ चंपा षष्ठी भी कहते हैं. भगवान कार्तिकेय की आरती और तीन बार परिक्रमा करने के बाद ऊं स्कंद शिवाय नमः मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है. इसके बाद आरती का आचमन कर आसन को प्रणाम करें और प्रसाद ग्रहण करें.
मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें
मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें
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https://hindi.news18.com/news/dharm/skanda-sashti-vrat-2025-ravi-yog-know-puja-vidhi-and-importance-of-skanda-sashti-vrat-in-astrology-ws-kl-9610231.html

















