Tuesday, March 10, 2026
33 C
Surat
[tds_menu_login inline="yes" guest_tdicon="td-icon-profile" logout_tdicon="td-icon-log-out" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNiIsIm1hcmdpbi1ib3R0b20iOiIwIiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyNSIsImRpc3BsYXkiOiIifSwicG9ydHJhaXQiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiMiIsIm1hcmdpbi1sZWZ0IjoiMTYiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsImxhbmRzY2FwZSI6eyJtYXJnaW4tcmlnaHQiOiI1IiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyMCIsImRpc3BsYXkiOiIifSwibGFuZHNjYXBlX21heF93aWR0aCI6MTE0MCwibGFuZHNjYXBlX21pbl93aWR0aCI6MTAxOX0=" icon_color="#ffffff" icon_color_h="var(--dark-border)" toggle_txt_color="#ffffff" toggle_txt_color_h="var(--dark-border)" f_toggle_font_family="global-font-2_global" f_toggle_font_transform="uppercase" f_toggle_font_weight="500" f_toggle_font_size="13" f_toggle_font_line_height="1.2" f_toggle_font_spacing="0.2" ia_space="0" menu_offset_top="eyJhbGwiOiIxNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTIiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMyJ9" menu_shadow_shadow_size="16" menu_shadow_shadow_color="rgba(10,0,0,0.16)" f_uh_font_family="global-font-1_global" f_links_font_family="global-font-1_global" f_uf_font_family="global-font-1_global" f_gh_font_family="global-font-1_global" f_btn1_font_family="global-font-1_global" f_btn2_font_family="global-font-1_global" menu_uh_color="var(--base-color-1)" menu_uh_border_color="var(--dark-border)" menu_ul_link_color="var(--base-color-1)" menu_ul_link_color_h="var(--accent-color-1)" menu_ul_sep_color="#ffffff" menu_uf_txt_color="var(--base-color-1)" menu_uf_txt_color_h="var(--accent-color-1)" menu_uf_border_color="var(--dark-border)" show_version="" icon_size="eyJhbGwiOjIwLCJwb3J0cmFpdCI6IjE4In0=" menu_gh_color="var(--base-color-1)" menu_gh_border_color="var(--dark-border)" menu_gc_btn1_color="#ffffff" menu_gc_btn1_color_h="#ffffff" menu_gc_btn1_bg_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn1_bg_color_h="var(--accent-color-2)" menu_gc_btn2_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn2_color_h="var(--accent-color-2)" f_btn2_font_size="13" f_btn1_font_size="13" toggle_hide="yes" toggle_horiz_align="content-horiz-center" menu_horiz_align="content-horiz-center" f_uh_font_weight="eyJsYW5kc2NhcGUiOiI3MDAiLCJhbGwiOiI3MDAifQ==" f_gh_font_weight="700" show_menu="yes" avatar_size="eyJhbGwiOiIyMiIsImxhbmRzY2FwZSI6IjIxIiwicG9ydHJhaXQiOiIxOSJ9" page_0_title="My Articles" menu_ul_sep_space="0" page_0_url="#"]

Udupi Shri Krishna Matha temple know importance and history of Krishna Matha Udupi mandir | गैर-ब्राह्मण का प्रवेश था वर्जित, भक्त के आंसू देख भगवान ने बदल दिए सभी नियम, गर्भगृह से दर्शन बंद


Last Updated:

वैसे तो आपने कई मंदिरों के रहस्यों के बारे में सुना या देखा होगा लेकिन भारत के कर्नाटक राज्य में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान ने एक भक्त के लिए सभी नियम तोड़ दिए. भक्त और भगवान का ऐसा दृश्य कहीं और देखने को नहीं मिलता. आइए जानते हैं भगवान कृष्ण के इस मंदिर के बारे में…

ख़बरें फटाफट

गैर-ब्राह्मण का प्रवेश था वर्जित, भक्त के आंसू देख भगवान ने बदल दिए सभी नियम

Udupi Shri Krishna Matha Temple: कहते हैं जब कोई नहीं सुनता तब भगवान सुनते हैं और सहायता के लिए आते हैं. इस मान्यता को कर्नाटक के उडुपी शहर में बना श्री कृष्ण मंदिर पूरा करता है. माना जाता है कि यहां भक्त की करुण पुकार को सुनकर भगवान ने मंदिर की दीवार तोड़ दी थी और खुद को 180 डिग्री पर घुमा लिया था. ये मंदिर भक्त की भक्ति और भगवान की उदारता का प्रतीक है. भक्त और भगवान का ऐसा दृश्य पूरे विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलता. एक भक्त के लिए भगवान ने मंदिर की दीवार तक तोड़ दीं और सभी नियम बदल दिए. मान्यता है कि यहां दर्शन करने मात्र से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और भक्ति मन पूरी तरह शांत और साफ हो जाता है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में…

अब इस तरह होते हैं भगवान के दृश्य
कर्नाटक के उडुपी शहर में श्री कृष्ण मठ के अंदर श्री कृष्ण मंदिर स्थित है. इस मंदिर की खास बात ये है कि यहां भक्त गर्भगृह में जाकर भगवान के दर्शन नहीं करते, बल्कि एक नौ छिद्रों वाली खिड़की से भगवान को निहारते हैं. भक्तों को ऐसा लगता है कि स्वयं भगवान कृष्ण मंदिर की खिड़की से उन्हें निहार रहे हैं. इस खिड़की को नवग्रह कीटिका भी कहा जाता है और इसे चांदी से बनाया गया है. भक्त झरोके से देखकर भगवान का अद्भुत दर्शन करते हैं.

यह मंदिर की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा की मानें तो गरीब कनकदास भगवान श्री कृष्ण के बहुत बड़े भक्त थे. हर समय उनकी जुबान पर भगवान श्री कृष्ण का नाम रहता था. वे भगवान श्री कृष्ण के लिए खुद के बनाए हुए भजन भी गाते थे. ऐसे ही एक दिन हरि-हरि का नाम गाते-गाते वे उडुपी पहुंचे और मंदिर में भगवान के दर्शन की इच्छा जाहिर की, लेकिन गैर-ब्राह्मण होने की वजह से उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं मिला. अब रोते हुए कनकदास मंदिर के पीछे जाकर बैठ गए और विलाप करते हुए करुणा भरे स्वर से भगवान को पुकारने लगे. उन्होंने भजनों के माध्यम से भगवान को कहा कि उन्हें गैर-ब्राह्मण क्यों बनाया.

भगवान ने बदल दिए सभी नियम
कनकदास की पुकार सुनकर भगवान श्री कृष्ण खुद को रोक नहीं पाए और गर्भगृह में खुद को 180 डिग्री घुमाकर मंदिर की दीवार तोड़ दी. माना जाता है कि दीवार में एक बड़ी सी दरार पड़ी और झरोका बन गया. स्वयं भगवान को अपने सामने देखकर कनकदास उनके चरणों में गिर पड़े. जब ये बात मंदिर के पुजारियों को पता चली तो उन्होंने कनकदास से माफी मांगी.

पीएम मोदी भी कर चुके हैं दर्शन
इसी दिन से भक्त भगवान के गर्भगृह में जाकर नहीं, बल्कि झरोके से दर्शन करते हैं. इस झरोके को कनकदास का झरोका भी कहा जाता है. बाद में कनकदास के तमिल भजन बहुत प्रचलित हुए और आज भी उन्हें गाया जाता है. हाल ही में इस मठ में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दर्शन के लिए पहुंचे थे और मठ के अंदर बने कई मंदिरों के दर्शन किए थे.

About the Author

authorimg

Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

homedharm

गैर-ब्राह्मण का प्रवेश था वर्जित, भक्त के आंसू देख भगवान ने बदल दिए सभी नियम


.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.

https://hindi.news18.com/news/dharm/udupi-shri-krishna-matha-temple-know-importance-and-history-of-krishna-matha-udupi-mandir-ws-kl-9927353.html

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img