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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब जब बजट पेश करती हैं, तब तब उनकी साड़ी की चर्चाएं बढ़ने लगती हैं. इस बार वित्त मंत्री ने बैंगनी रंग की साड़ी पहनी हुई थी. साथ ही हर बार की तरह राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने दही खिला कर रवाना किया, हमारे समाज में दही सिर्फ स्वाद का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह धार्मिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कई मायनों में खास माना जाता है. आइए जानते हैं इनका महत्व.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज बजट 2026-27 पेश किया. यह भारत का 53.5 लाख करोड़ रुपये का बजट है. निर्मला सीतारमण ने 2026 -27 का बजट पेश कर्तव्य पर फोकस करते हुए पेश किया. बजट पढ़ने से पहले हर साल की तरह इस साल भी वित्त मंत्री राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने दही खिला कर रवाना किया, यह हमारी भारतीय संस्कृति का एक पहलू है. मंदिरों में भोग में, त्योहारों में या फिर घर में किसी खुशी के मौके पर दही हमेशा से शुभता और समृद्धि का प्रतीक रहा है. इस दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री ने बैंगनी रंग की साड़ी पहनी हुई थी. आखिर भारतीय संस्कृति में इस रंग का क्या अर्थ है? आध्यात्मिकता और ज्योतिष के अनुसार, माना जाता है कि रंग व्यक्ति के मनोदशा और निर्णयों को प्रभावित करते हैं.

बैंगनी रंग एक आध्यात्मिक रहस्य
आध्यात्मिक दृष्टि से, बैंगनी रंग मानवीय बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता और उच्च चेतना का प्रतीक है. चूंकि बजट एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है जो देश के आर्थिक भविष्य को निर्धारित करती है, इसलिए यह रंग निर्णय लेते समय आवश्यक स्थिरता और दिव्य चेतना का संचार करता है. बैंगनी रंग लाल की ऊर्जा और नीले की शांति को संतुलित करता है. यह भावनाओं को नियंत्रित करने और तर्कसंगत रूप से सोचने में सहायक होता है.

गरिमा और संप्रभुता का प्रतीक
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बैंगनी रंग बृहस्पति और शनि ग्रहों के गुणों का संयोजन है. बृहस्पति ज्ञान, विस्तार और समृद्धि का प्रतीक है, जबकि शनि अनुशासन और न्याय का प्रतीक है. बैंगनी रंग को शाही रंग के रूप में जाना जाता था. यह शक्ति, गरिमा और संप्रभुता का प्रतीक है.
मनोविज्ञान और ऊर्जा
बजट दिवस पर इस रंग को पहनने से नेतृत्व गुणों का प्रदर्शन होता है और आम लोगों में विश्वास पैदा करने में मदद मिलती है. यह समाज के सर्वांगीण विकास की कामना करने वाली परोपकारी भावना को भी बढ़ावा देता है. बैंगनी रंग रचनात्मकता और रहस्य का प्रतीक है. वित्तीय गणनाएँ जटिल होती हैं, इसलिए यह रंग एकाग्रता बढ़ाने और जटिल चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करने में सहायक माना जाता है. यह सीमित बजट में नए प्रोजेक्ट बनाते समय आवश्यक कल्पनाशीलता को भी प्रेरित करता है.

दही और भारतीय परंपरा
दही का उल्लेख वेदों और पुराणों में भी मिलता है. इसे पवित्र माना जाता है और घर की लक्ष्मी के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले दही खाने की परम्परा सदियों पुरानी है. इससे जुड़ी मान्यता है कि मीठा दही खाने से शुरू करने जा रहे काम के शुभ फल प्राप्त होते हैं.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें
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