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Vastu Shastra directions। वास्तु शास्त्र में 10 दिशाओं का महत्व

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Vastu Shastra Directions: भारतीय संस्कृति में वास्तु शास्त्र का बहुत बड़ा महत्व है. माना जाता है कि घर, ऑफिस या किसी भी जगह का निर्माण करते समय दिशाओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. ज्यादातर लोग सिर्फ चार दिशाओं – पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण को ही पहचानते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में कुल 10 दिशाओं का वर्णन मिलता है. हर दिशा का अपना देवता और प्रभाव होता है. यही वजह है कि किसी भी काम की शुरुआत करने से पहले दिशा का महत्व जरूर देखा जाता है, अगर सही दिशा का ध्यान रखा जाए तो जीवन में सुख, शांति और तरक्की आती है, जबकि गलत दिशा का असर दिक्कतें बढ़ा सकता है. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य रवि पराशर से इन 10 दिशाओं के नाम, देवता और इनके महत्व के बारे में विस्तार से.

10 दिशाओं के नाम और उनके महत्व
1. ईशान दिशा
उत्तर और पूर्व दिशा के बीच का स्थान ईशान कोण कहलाता है. इसके देवता भगवान शिव हैं और ग्रह स्वामी बृहस्पति. इस दिशा में पूजा स्थल या खिड़की-दरवाजा होना शुभ माना जाता है. यह दिशा घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है.

3. वायव्य दिशा
उत्तर और पश्चिम के बीच की दिशा वायव्य कहलाती है. इसके देवता वायु देव और ग्रह स्वामी चंद्रमा हैं. यहां हल्का-फुल्का सामान रखना रिश्तों में मिठास लाता है. इस दिशा को गंदा या भारी सामान से भरा नहीं रखना चाहिए.

4. पश्चिम दिशा
इसके देवता वरुण देव और ग्रह स्वामी शनि हैं. इस दिशा को खाली नहीं छोड़ना चाहिए. यहां भारी सामान रखना शुभ होता है. माना जाता है कि इस दिशा को खाली रखने से व्यापार और कामकाज में रुकावटें आ सकती हैं.

5. उत्तर दिशा
उत्तर दिशा के देवता कुबेर यानी धन के देवता हैं और ग्रह स्वामी बुध. इस दिशा को धन लाभ की दिशा कहा जाता है. यहां लक्ष्मी माता की तस्वीर लगाने से घर में समृद्धि बनी रहती है और पैसों की कमी नहीं होती.

6. आग्नेय दिशा
दक्षिण और पूर्व के बीच की दिशा आग्नेय कहलाती है. इसके देवता अग्नि देव और ग्रह स्वामी शुक्र हैं. इस दिशा में रसोई बनाना बेहद शुभ माना जाता है. यहां आग से जुड़े काम करने पर घर में सुख-शांति बनी रहती है.

7. दक्षिण दिशा
दक्षिण दिशा के देवता यमराज हैं और ग्रह स्वामी मंगल. इस दिशा में भारी सामान रखना ठीक माना गया है, लेकिन यहां मुख्य दरवाजा बनाना अशुभ माना जाता है.

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8. नैऋत्य दिशा
दक्षिण और पश्चिम के बीच की दिशा नैऋत्य कहलाती है. इसके देवता नैऋत और ग्रह स्वामी राहु-केतु हैं. इस जगह को ऊंचा और भारी रखना शुभ है, लेकिन यहां पानी का कोई स्रोत नहीं होना चाहिए.

9. ऊर्ध्व दिशा
आकाश की ओर जाने वाली दिशा ऊर्ध्व कहलाती है. इसके स्वामी ब्रह्मा देव हैं. इस दिशा के कोई ग्रह स्वामी नहीं हैं. माना जाता है कि इस दिशा की ओर मुंह करके की गई प्रार्थना फलदायी होती है.

10. पाताल या अधो दिशा
नीचे धरती या पाताल की ओर जाने वाली दिशा अधो कहलाती है. इसके देवता नाग देवता हैं. इसीलिए नया घर बनाने या प्रवेश करने से पहले भूमि पूजन और गृह प्रवेश पूजा का महत्व बताया गया है.


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https://hindi.news18.com/astro/astro-tips-these-10-direction-of-vastu-know-its-importance-know-their-deities-ws-ekl-9646034.html

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