West Direction Bathroom : घर बनाते समय वास्तु शास्त्र का ध्यान रखना आज भी बड़ी संख्या में लोग जरूरी मानते हैं. खासकर बाथरूम, सीढ़ियां और दिशाओं का आपसी तालमेल वास्तु के नजरिए से काफी अहम होता है. कई बार ऐसा देखा जाता है कि जगह की कमी या डिजाइन के कारण बाथरूम के ठीक ऊपर सीढ़ियों का निर्माण कर दिया जाता है. पश्चिम दिशा में स्थित बाथरूम को आम तौर पर वास्तु के अनुसार ठीक माना जाता है, क्योंकि यह दिशा वरुण देव से जुड़ी मानी जाती है. वरुण देव को जल तत्व का प्रतिनिधि माना जाता है और बाथरूम भी जल से संबंधित स्थान होता है. लेकिन जब इसी पश्चिम दिशा के बाथरूम के ऊपर सीढ़ियां आ जाती हैं, तो यह स्थिति वास्तु दोष का रूप ले लेती है. यह दोष दिखने में साधारण लग सकता है, लेकिन इसके प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जा सकते हैं. वास्तु शास्त्र में हर स्थान की अपनी ऊर्जा और भूमिका बताई गई है. जब इन भूमिकाओं में टकराव होता है, तब समस्या उत्पन्न होती है. पश्चिम दिशा लाभ, स्थिरता और प्रगति से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए यहां होने वाला कोई भी असंतुलन पूरे घर पर असर डाल सकता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.
मुख्य वास्तु दोष: भार और ऊर्जा का असंतुलन
वास्तु शास्त्र में सीढ़ियों को भारी संरचना माना गया है. वहीं, बाथरूम ऐसी जगह होती है जहां से पानी और ऊर्जा दोनों का निकास होता है. जब सीढ़ियों जैसी भारी संरचना बाथरूम के ऊपर बना दी जाती है, तो यह भार और ऊर्जा के संतुलन को बिगाड़ देती है. इसका सीधा मतलब है कि जिस स्थान से ऊर्जा बाहर जानी चाहिए, वहां ऊपर से दबाव बन जाता है.
स्वास्थ्य से जुड़ा असर
इस तरह की बनावट का प्रभाव घर में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर देखा जा सकता है. विशेष रूप से पुरुष सदस्यों पर इसका असर अधिक माना जाता है. लगातार थकान, कमजोरी या बार-बार बीमार पड़ना जैसे संकेत सामने आ सकते हैं. यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब सीढ़ियां सीधे बाथरूम की छत को छू रही हों या बाथरूम बहुत छोटा और बंद महसूस होता हो.
आर्थिक स्थिरता पर प्रभाव
पश्चिम दिशा को लाभ और कमाई से जुड़ी दिशा माना जाता है. जब यहां बाथरूम के ऊपर भारी निर्माण होता है, तो संचित धन में कमी या कामकाज में रुकावटें आ सकती हैं. व्यापार से जुड़े लोगों को फैसलों में अड़चन, भुगतान में देरी या लाभ में कमी जैसे हालात का सामना करना पड़ सकता है.

घर का माहौल और तनाव
इस तरह की वास्तु स्थिति से घर के माहौल में भारीपन महसूस हो सकता है. बिना किसी साफ कारण के तनाव, चिड़चिड़ापन या असहजता बनी रह सकती है. ऐसा इसलिए माना जाता है क्योंकि ऊर्जा का स्वाभाविक प्रवाह बाधित हो जाता है.
क्या यह दोष गंभीर माना जाता है?
अगर सीढ़ियां बाथरूम की छत को सीधे छूती हैं या बाथरूम में हवा और रोशनी की कमी है, तो यह दोष ज्यादा असर दिखाता है. वास्तु के अनुसार शौचालय के ऊपर ऐसी जगह नहीं होनी चाहिए जहां लोग चलते या बैठते हों, क्योंकि वहां की नकारात्मक ऊर्जा ऊपर की ओर जाती है.

सरल उपाय
अगर निर्माण में बदलाव संभव नहीं है, तो कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं. बाथरूम के अंदर कांच के कटोरे में समुद्री नमक रखें और हर 15 दिन में बदलें. दीवारों के लिए सफेद, हल्का नीला या ग्रे रंग चुनें और गहरे रंगों से बचें. बाथरूम के दरवाजे या बाहरी दीवार पर वास्तु पिरामिड लगाने से भी संतुलन बेहतर होता है. साथ ही बाथरूम की साफ-सफाई और वेंटिलेशन पर खास ध्यान दें.
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