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मिथिला के लोकगीतों की है अलग पहचान, जन्म से लेकर मौत सबके लिए है गाना, सांझ, प्राती, समदाउन, कोहबर फॉक सॉन्ग का है ख़ास मतलब  – Bihar News

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मधुबनी. भारत जैसे देश में हर राज्य और वहां की कुछ ख़ास समुदाय की अपनी लोकगीत और लोकनृत्य होती है. ऐसे में यहां भी गीत गाने का  एक समय है, जैसे सुबह,शाम, स्पेशल पर्व त्योहार आदि के हर गीतों का अपना एक विशेष महत्व ,समय और सॉन्ग के माध्यम से मैसेज है.

मिथिला में हैं कई प्रकार के लोकगीत
यूं तो हर राज्य में कई सारे समुदाय होते है और वहां का अपनी लोक भाषा- लोक गीत गाया जाता है. इसी में एक है बिहार प्रांत के  अंतर्गत आने में मैथिल समुदाय में बोली जाने वाली अपनी भाषा मैथिली है, जिसे संविधान के आठवें अनुसूचि से राष्ट्रीय भाषा की मान्यता भी प्राप्त है. बता दें कि इस भाषा के बारे में कहा जाता है कि यह विश्व की सबसे मीठी भाषा में गिनती है मैथिली में गाली भी बहुत प्रेम से दी जाती है. आज हम आपको बताते है मिथिला क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले त्यौहार, जन्म, सुख- दुःख , मृत्यु हर समय का लोक (फॉक) गीत है और सबका मतलब भी बड़ा ख़ास है.

फॉक सॉन्ग का अर्थ
मैथिल फॉक सॉन्ग बारहमासा(जब साल की अंत होते तो गाया जाता), छःमासा(यह अर्ध वर्ष पर खुशी से गाते ताकि आधे साल अच्छा रहा) , चौमासा(नाम से स्पष्ट है 4 महीने पर पूरी पकवानों का बनाते हुए कुछ महिलाएं गीत गाती) , ऋतु वसंत, सोहर(उत्साह के मौके पर), खिलौना (जन्म, जेनेव, मुंडन आदि), समदौन (बेटी की विदाई में) , चैतावरी(चैत्र मास में), चूमाना( शादी में), परीक्षण( शादी के समय ख़ास विधिः), नचारी(भोलेबाबा के लिए), महेशवाणी( भोलेबाबा का वर्णन), बटगवनी (शुभ कार्य में रास्ते में गानेवाले गीत) , झरनी(सावन में),लगनी (लड़का -लड़की की शादी का लगन चढ़ना), उदासी (विदाई), सुहाग (सिंदूरदान), चनाई (मधुश्रवाणी -पंचमी), बिसहैर ( नाग देव) ,भगवान गीत, प्राती (3-4 सुबह) आदि ऐसे बहुत सारे फॉक सॉन्ग हैं.

बदलते समय के साथ सबकुछ बदल रहा है, लेकिन ये आज भी यहां पर्व त्योहार में दिखाई देती है. पुराने लोगों को याद है और नई जेनरेशन इंटरनेट का सहारा लेकर ही पर क्षेत्रीय परंपरा को निभा रहे हैं.


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/culture-mithila-folk-songs-sing-from-happiness-to-death-sanjh-prati-samadhou-kohbar-falk-song-is-of-special-meaning-local18-ws-l-9496927.html

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