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अस्पताल नहीं बल्कि चित्रूकट में इस वृक्ष की पूजा करने जाते हैं निसंतान दंपत्ति, कुछ ही दिनों में घर में गूंजने लगती हैं किलकारियां


चित्रकूट: धर्म नगरी चित्रकूट प्रभु श्रीराम की तपोस्थली रही है. इस स्थान ने श्री राम ने अपने वनवास काल के साढ़े ग्यारह वर्ष बिताए थे. ऐसे में आज हम आपको यहां के एक खास वृक्ष के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है. यह वृक्ष श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है और यहां संतान की कामना करने वाले जोड़े हर साल खास अवसरों पर पूजा करने आते हैं.

500 वर्ष पुराना है यह वृक्ष

चित्रकूट के कांच मंदिर के समीप स्थित इस वृक्ष को ‘पुत्र दायनी वृक्ष’ कहा जाता है. यह वृक्ष लगभग 500 साल पुराना है और आज भी हरा-भरा रहता है. यहां दूर-दूर से लोग आते हैं. जहां वे विशेष रूप से संतान सुख की कामना करते हैं. मान्यता है कि इस वृक्ष की पूजा से सूनी गोद में किलकारियां गूंजने लगती हैं. यहां पर हर साल अमावस्या के समय विशेष मेले का आयोजन किया जाता है. इन अवसरों पर संतान की इच्छा रखने वाले भक्त इस वृक्ष की पूजा करते हैं. जहां पूजा के बाद उन्हें वृक्ष की पत्तियां दी जाती हैं. पत्तियों को घर ले जाने से संतान सुख की प्राप्ति होती है.

पुजारी ने दी मंदिर के बारे में जानकारी

वहीं, इस पेड़ के पुजारी राघवेंद्र पांडे ने Bharat.one को जानकारी देते हुए बताया कि पुत्र दायनी वृक्ष का इतिहास भी अत्यंत दिलचस्प है. यह वृक्ष वैष्णो संप्रदाय से जुड़ा हुआ है. इसे लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास स्थित प्रमोद वन में ‘पुत्र जीवन कल्प वृक्ष’ के रूप में जाना जाता है.

पूजा करने से राजा को हुई थी संतान की प्राप्ति

बताया जाता है कि रीवा के राजा विश्वनाथ प्रताप को संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो रही थी. तब राजा ने अपने दुर्भाग्य को दूर करने के लिए बद्री नारायण से सोने की पालकी में अखंड कीर्तन करते हुए इस वृक्ष को चित्रकूट लाया और मंदाकिनी नदी के किनारे इसकी स्थापना की. इसके बाद राजा के घर संतान की प्राप्ति हुई और उनका पुत्र रघुराज नारायण का जन्म हुआ था.

उन्होंने आगे की जानकारी देते हुए बताया कि राजा ने संतान प्राप्ति के उपलक्ष्य में 507 कोठरी बनवाने का आदेश दिया, जो आज भी चित्रकूट में देखने को मिलती है. इस वृक्ष को लेकर श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां पूजा करने से कोई भी महिला जिसे संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो रही है. वह एक से डेढ़ साल के अंदर आशीर्वाद से संतान की प्राप्ति कर लेती है.

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