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प्रयागराज ही नहीं यूपी में यहां भी है गंगा-युमना का सगंम, बड़ी संख्या में स्नान करने पहुंचते हैं श्रद्धालु

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सहारनपुर: भारत पौराणिक काल से ही सनातन धर्म को मानने वाला देश है. भारत में लोग देवी देवताओं का पूजन करने के साथ-साथ ऋषि-मुनि और पंडितों को भी आराध्य का दर्जा देते हैं. सनातन धर्म में मूर्ति पूजा होती है. इसके साथ ही गाय को भी माता का दर्जा दिया गया है. ऐसे ही भारत के लोग नदियों के प्रति भी अटूट आस्था रखते हैं. आदिकाल से ही गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों नदियों को शास्त्रों में मां का दर्जा दिया हुआ है.

यहां गांव में हुआ है गंगा और यमुना का मिलन
ऐसे में सहारनपुर के लोग अपनी पूजा पाठ और स्नान करने के लिए हरिद्वार जाते हैं, लेकिन अब सहारनपुर में भी गंगा यमुना का संगम होने लगा है. जहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु रोजाना पहुंचकर स्नान, पूजा पाठ इत्यादि करते हैं. हम बात कर रहे हैं सहारनपुर शामली जनपद की सीमा पर बसे गांव कुआंखेड़ा का. इस गांव में गंगा और यमुना का मिलन हो रहा है.

गांव में मिला गंगा-युमना का पान
जहां लगभग 10 साल पहले सहारनपुर से होकर जा रही गंगा और यमुना नदी कुआंखेड़ा गांव में जाकर मिल गई. तब जाकर लोगों को पता चला कि हरिद्वार, प्रयागराज की तरह सहारनपुर में भी 2 नदियों का संगम है और उनको पूजा पाठ करने के लिए अब हरिद्वार नहीं जाना पड़ता है.

नदियों का पानी मिलने से ऐतिहासिक बना गांव
सहारनपुर के रहने वाले रवि सैनी ने कुआंखेड़ा गांव में होने वाले संगम के विषय मे जानकारी देते हुए बताया कि हथनी कुंड बैराज से निकली नहर और गंगा नदी से निकली नहर का पानी कुआंखेड़ा गांव में आकर मिल जाता है. जिसे शास्त्रों के अनुसार संगम कहा गया है. गांव कुआंखेड़ा में इस संगम घाट को हरिद्वार की तरह ही विकसित किया गया है.

यहां आस्था की डुबकी लगाते हैं श्रद्धालु
यहां पर हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश के कई जनपदों से श्रद्धालु पहुंचकर अपने पितरों की पूजा, स्नान इत्यादि करते हैं. रवि सैनी बताते हैं कि किसी ने इस बात को कभी सोचा भी नहीं था कि स्थानीय स्तर पर दोनों नदियों का मिलन होकर यहां पर ऐतिहासिक संगम होगा. अब यह क्षेत्र संगम के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध हो गया है. हर साल यहां पर एक विशाल मिले का भी आयोजन होता है. जहां पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और इस संगम में आस्था की डुबकी लगाते हैं.

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