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Varuthini Ekadashi : हर महीने दो एकादशी पड़ती हैं. इस दिन जगतपति भगवान श्री हरि विष्णु की विधि विधान पूर्वक पूजा की जाती है. इससे आपका मन प्रसन्न रहता है.
एकादशी
हाइलाइट्स
- वरुथिनी एकादशी 24 अप्रैल को मनाई जाएगी.
- पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:45 से 7:25 तक रहेगा.
- वरुथिनी एकादशी का व्रत 10000 वर्षों के तप के बराबर पुण्य देता है.
अयोध्या. सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है. प्रत्येक महीने दो एकादशी का व्रत रखा जाता है. साल में 24 एकादशी का व्रत होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन जगतपति भगवान श्री हरि विष्णु की विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना की जाती है. वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को ‘वरुथिनी एकादशी’ के नाम से जाना जाता है. इस एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है. मन प्रसन्न रहता है. आइए समझते हैं कि इस बार वरुथिनी एकादशी कब है और ये क्या है. इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है.
जानें तिथि
अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी 24 अप्रैल को मनाई जाएगी. इसमें 23 अप्रैल को शाम 4:43 से कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत होगी, जो 24 अप्रैल को दोपहर 2:32 पर समाप्त होगी. पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:45 से 7:25 तक रहेगा.
करें पाठ
धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि जो भी भक्त वरुथिनी एकादशी का व्रत करता है, उसे 10000 वर्षों तक तप करने के बराबर पुण्य का फल प्राप्त होता है. वरुथिनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद भगवान श्री हरि विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए. विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना करनी चाहिए. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से जीवन के सभी पाप दूर होते हैं.







