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कान छिदवाना सिर्फ परंपरा नहीं, इसके पीछे है साइंस! 16 संस्कारों में सबसे खास, बीमारियों से भी बचाए


Agency:Local18

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Ear Piercing Benefits: हिंदू धर्म में कर्णवेध संस्कार बच्चों के कान छिदवाने की परंपरा है, जो स्वास्थ्य और आध्यात्मिक कारणों से की जाती है. यह एक्यूप्रेशर पॉइंट्स के माध्यम से बीमारियों को कम करने में मदद करता ह…और पढ़ें

कान छिदवाना सिर्फ परंपरा नहीं, इसके पीछे है साइंस! बीमारियों से भी बचाए

बच्चों के कान छिदवाने के वैज्ञानिक और धार्मिक कारण

हाइलाइट्स

  • कर्णवेध संस्कार से बीमारियों का खतरा कम होता है.
  • कान छिदवाने से एक्यूप्रेशर पॉइंट्स सक्रिय होते हैं.
  • बच्चों के कान छिदवाने की सही उम्र छह महीने है.

कुणाल दंडगवाल/ नासिक: हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल 16 संस्कार बताए गए हैं. इन संस्कारों के पीछे कुछ आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण होते हैं. इन्हीं में से एक है बच्चों के कान छिदवाना. चाहे लड़का हो या लड़की, हिंदू धर्म में दोनों के ही बचपन में कान छिदवाए जाते हैं, जिसे कर्णवेध संस्कार कहा जाता है.

कान छिदवाने के पीछे वैज्ञानिक कारण
Bharat.one से बात करते हुए नासिक के महंत अनिकेत शास्त्री ने बताया कि बचपन में बच्चों के कान छिदवाने के पीछे वैज्ञानिक कारण बताया जाता है. हमारे शरीर में विभिन्न स्थानों पर एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिससे हम शरीर का संतुलन बनाए रख सकते हैं. कुछ बीमारियों पर नियंत्रण पाने की क्षमता इन पॉइंट्स में होती है. ऐसा ही एक पॉइंट कान में होता है, जहां कान छिदवाए जाते हैं. हिंदू धर्म ग्रंथों में भी कर्णवेध संस्कार का उल्लेख किया गया है.

ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों के कर्णवेध संस्कार हुए होते हैं, उन्हें अर्धांगवायू (Hemiplegia), मधुमेह और हर्निया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है. खास बात यह है कि हिंदू धर्म में बच्चों के कान छिदवाना आवश्यक माना जाता है. बच्चे के जन्म के 16वें दिन या उसके बाद के तीन महीनों में कान छिदवाए जाते हैं. बच्चे के नामकरण की तरह ही कान छिदवाने का भी एक महत्वपूर्ण उत्सव माना जाता है.

बच्चों के कान क्यों छिदवाए जाते हैं?
बता दें कि बच्चों के कान छिदवाने के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारणों के साथ-साथ परंपरा भी एक महत्वपूर्ण कारण है. एक्यूपंक्चर थेरेपी के अनुसार, कान छिदवाने से विभिन्न बीमारियों का खतरा कम होता है. बच्चों के बड़े होने पर कान छिदवाने की बजाय बचपन में ही कान छिदवाने से उन्हें कम दर्द होता है और अस्वस्थता भी कम होती है. कुछ माता-पिता बच्चों के कान छिदवाने के पीछे सांस्कृतिक या पारंपरिक मूल्य मानते हैं. भारतीयों के साथ-साथ दुनिया के कई माता-पिता अपने बच्चों के कान छिदवाते हैं.

किस उम्र में कान छिदवाना सही है?
कुछ परंपराओं में बच्चों के कान जन्म के तुरंत बाद छिदवाए जाते हैं, जबकि कुछ माता-पिता अन्य कारणों से बाद में कान छिदवाने का निर्णय लेते हैं. यदि बच्चे का स्वास्थ्य अच्छा है और उसमें कोई अन्य जटिलता नहीं है, तो जन्म के बाद कान छिदवाने के बारे में डॉक्टर की सलाह लेना उचित है.

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बच्चों के कान छिदवाना कब सुरक्षित है?
बच्चों के कान छिदवाने से उन्हें जोखिम होता है. इसलिए कई माता-पिता असमंजस में रहते हैं कि क्या यह सही उम्र है. जब आप बच्चों के कान छिदवाते हैं, तो संक्रमण का खतरा होता है क्योंकि बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती. इसलिए कान छिदवाने के लिए थोड़ा इंतजार करना बेहतर होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के कान छिदवाने के लिए छह महीने की उम्र तक इंतजार करना चाहिए. लेकिन आप इससे अधिक समय भी इंतजार कर सकते हैं.

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कान छिदवाना सिर्फ परंपरा नहीं, इसके पीछे है साइंस! बीमारियों से भी बचाए

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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