गुमला: झारखंड का गुमला जिला पेड़-पौधे, जंगल, पहाड़, नदियों, झरना, डैम, धार्मिक स्थल, पर्यटन स्थल और ऐतिहासिक स्थलों से भरा पड़ा है. इन्हीं प्रमुख स्थलों में से एक सिरा सीता धाम है. जो आदिवासियों का सबसे प्रमुख और धार्मिक तीर्थ स्थल है. यह गुमला जिले के डुमरी प्रखंड के अकासी गांव में स्थित है. यहां के प्रसिद्ध सिरा सीता धाम को झारखंड सरकार के पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग द्वारा राजकीय मेला/जतरा का दर्जा प्रदान किया गया है. यहां सिरसी-ता-नाले (दोन) दव डहरे एकना मेला (सिरा सीता धाम मेले) का आयोजन किया जाता है.
मेले में ये मंत्री भी होंगे शामिल
इस साल 23 जनवरी का दिन शुक्रवार को सिरसी-ता-नाले ककड़ो लाता में सरना धर्म आध्यात्मिक महासमागम (राजकीय समारोह) का भव्य आयोजन किया जा रहा है. वहीं, बताते चलें कि इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड सरकार के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री चमरा लिंडा शामिल होंगे.
आदिवासियों का है सबसे पवित्र मेला
वहीं, बता दें कि पिछले वर्ष यह भव्य और आदिवासियों का पवित्र मेला सिरसी-ता-नाले (दोन) दव डहरे एकना राजकीय समारोह 3 फरवरी, 2025 को आयोजित किया गया था. इस वर्ष यह मेला बसंत पंचमी के शुक्ल पक्ष के दिन को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है. मान्यता के अनुसार बढ़ती हुई चांद में और विषम तिथि के दिन में जैसे तृतीया, पंचमी ,सप्तमी, एकादशी आदि दिनों को शुभ कार्य के लिए पवित्र माना जाता है. इन्हीं तिथियों में शादी-विवाह, पूजा पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव आदि मनाए जाते हैं.
राजकीय मेला की तरह मनाया जाता है ये पर्व
बता दें कि इसे राजकीय मेला के रूप में हर साल मनाया जा रहा है. वहीं, इस मेले में धार्मिक तीर्थ यात्रा के रूप में 22 पड़हा सरना प्रार्थना महासभा सदमा ओरमांझी रांची से बहुत सारे अनुयायी लोग पैदल इस राजकीय समारोह में पहुंच रहे हैं. इस मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है. इसलिए श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा सेवाएं, यातायात प्रबंधन और विधि-व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन भी तैयार है.
यहां ऊंचे-ऊंचे हैं पहाड़
बता दें कि सिरा सीता धाम गुमला जिले के डुमरी प्रखंड के अकासी गांव में है, जिसे सिरासीता नाला उर्फ ककड़ोलता भी कहते हैं. यह 1000 फीट से अधिक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है. इसे मानव का उत्पति स्थल भी माना जाता है. आदिवासी समाज की गहरी आस्था इस सिरासीता नाले से जुड़ी हुई है. जहां ऐसे तो रोजाना राज्य के विभिन्न इलाकों से भक्तों का आना जाना लगा रहता है, लेकिन राजकीय समारोह के दिन बिहार, छत्तीसगढ़, असम, बंगाल, मध्य प्रदेश, ओड़िशा, राजस्थान सहित झारखंड के 24 विभिन्न जिलों से 1 लाख से अधिक आदिवासी शामिल होते हैं. साथ ही विदेशों से भी आदिवासी यहां पहुंचते हैं.







