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छठ पूजा में बांस की डाली का विशेष महत्व, जानें किन पूजन सामग्रियों को रखना है जरूरी, जानें ज्योतिषाचार्य से


परमजीत /देवघर: छठ महापर्व, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार, पूरे श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाता है. इस पर्व में सूर्य देवता और छठी मैया की पूजा की जाती है. देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल के अनुसार, छठ पूजा में बांस की बनी डाली का खास महत्व है. इस डाली में विभिन्न प्रकार की पूजन सामग्रियों को सजाया जाता है, जिन्हें व्रती छठ घाट पर लेकर जाती हैं. माना जाता है कि इन सामग्रियों के साथ छठ मईया को अर्घ्य देने से परिवार में सुख, समृद्धि और हर प्रकार की मनोकामना पूरी होती है.

छठ महापर्व में बांस की बनी डाली का उपयोग पुरानी परंपरा का हिस्सा है. बांस की डाली में रखी वस्तुएँ प्राकृतिक और शुद्ध होती हैं, जो इस पर्व की पवित्रता को बढ़ाती हैं. इसमें फल, फूल और प्रसाद को विशेष रूप से रखा जाता है, जिन्हें अर्घ्य देने के लिए छठ घाट तक ले जाया जाता है. इस यात्रा को पवित्र माना जाता है और भक्त अपने कांधों पर या सिर पर डाली को ले जाकर छठी मईया के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं.

छठ पूजा की मुख्य सामग्रियाँ जो डाली में होनी चाहिए:
ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल के अनुसार, डाली में कुछ सामग्रियों का होना अत्यंत आवश्यक होता है. ये सामग्रियाँ न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं बल्कि इनमें स्वास्थ्य और समृद्धि के लाभ भी निहित होते हैं. आइए जानते हैं कि कौन-कौन सी वस्तुएँ छठ की डाली में अनिवार्य रूप से रखनी चाहिए.

गन्ना: गन्ने का बंडल छठ पूजा का प्रमुख हिस्सा होता है. इसे डाली में खड़ा कर रखा जाता है और माना जाता है कि यह धन और मिठास का प्रतीक है.

नारियल: नारियल को पूजा में शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसे छठी मईया के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के लिए डाली में अवश्य रखा जाता है.

पानीफल: पानीफल एक मौसमी फल है जो जल तत्व का प्रतीक है. छठ पूजा में इसका उपयोग विशेष रूप से किया जाता है क्योंकि यह पूजा को पवित्रता और सादगी का संदेश देता है.

हल्दी की गाँठ: हल्दी को शुभता और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है. इसे डाली में रखकर छठी मईया से स्वास्थ्य की कामना की जाती है.

केला: केला, जो प्रसाद का मुख्य फल है, डाली में रखने से समृद्धि का प्रतीक होता है और यह व्रतियों के आशीर्वाद के लिए रखा जाता है.

मखाना: मखाना को छठ पूजा में शुभ माना जाता है और यह प्रसाद के रूप में पूजा में शामिल किया जाता है.

सौंफ: सौंफ को पाचन और स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है. इसे पूजा में शुद्धता का प्रतीक मानकर रखा जाता है.

अदरक की जड़: अदरक की जड़ को विशेष तौर पर छठ पूजा में रखा जाता है क्योंकि यह स्वास्थ्य के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का प्रतीक है.

घंगरा (छोटा कद्दू): छठ पूजा में घंगरा का उपयोग बहुत शुभ माना जाता है, और यह विशेष फसल का प्रतीक है जो धरती की उपजाऊ क्षमता को दर्शाता है.

बादाम और ठेकुवा: ठेकुवा छठ पूजा का प्रमुख प्रसाद होता है. इसे शुद्ध आटे, गुड़ और घी से बनाया जाता है. इसके अलावा बादाम को भी पवित्रता और शक्ति का प्रतीक मानकर डाली में रखा जाता है.

सिंदूर और लाल कपड़ा: सिंदूर को लाल कपड़े में बांधकर डाली में रखा जाता है. इसे सुहाग और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, और इसे छठ घाट पर ले जाकर अर्पित किया जाता है.

छठ पूजा की तैयारी और इसका महत्व:
छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है और चार दिनों तक चलती है. इस दौरान व्रती महिलाएँ और पुरुष कठिन उपवास रखते हैं और केवल प्रसाद का सेवन करते हैं. व्रती खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं. इस उपवास को करना अत्यंत कठिन होता है, लेकिन यह व्रतियों के साहस और श्रद्धा का प्रतीक है. पर्व के तीसरे दिन ढलते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पर्व का समापन होता है.

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