अलीगढ़. कई घरों में अचानक परेशानी बढ़ जाना, लगातार बीमारियां लगना, लोगों का बिना वजह चिढ़चिढ़ा होना या डर महसूस करना, अजीब आवाज आना. ऐसे हालात में अक्सर घर वाले यह सोचने लगते हैं कि कहीं घर में कोई गंदी रूह, शैतानी असर या जिन्नात तो नहीं है. यह सवाल सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज का बड़ा हिस्सा इस बारे में जानना चाहता है कि क्या जिन्नात वाकई मौजूद होते हैं? और अगर होते हैं तो क्या वह इंसानी घरों में रह भी सकते हैं. इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए Bharat.one ने मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना इफराहीम हुसैन से बातचीत की. अलीगढ़ के चीफ मुफ्त ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना इफराहीम हुसैन बताते हैं कि जब किसी घर में यह सब अलामात (निशानियां) दिखाई देने लगें. जैसे घर में अचानक एक अजीब सा बोझ महसूस होना, बेतुकी लड़ाइयां होना, बच्चों का रातों को चीख कर उठना, खाना बासी लगना, दिल घबराना, बिना वजह डर लगना, बीमार हो जाना और दवा का काम न करना और सबसे बड़ी बात कि इंसान खुद भी समझ न पाए कि उसे आखिर क्या हो रहा है. तो ये सारी चीजें इशारा करती हैं कि वहां कोई नजर न आने वाला मख़लूक़ मौजूद है.
ये हर बार वहम नहीं
मौलाना इफराहीम बताते हैं कि ये हर बार वहम नहीं होता. कभी-कभी वो असर इतना तेज हो जाता है कि इंसान अपनी आदतों और मिज़ाज से बिल्कुल अलग हो जाता है. बहुत गुस्सा, बहुत चिढ़चिढ़ापन, बात-बात पर टूट पड़ना, या फिर बिल्कुल खामोश और उदास हो जाना. ये सब जिन्नाती असर की निशानियां होती हैं. मौलाना इफराहीम के अनुसार, इससे बचाव कैसे किया जाए? तो देखिए, इस्लाम में हर चीज़ का इलाज मौजूद है. शैतान और जिन्नात भी अल्लाह की मख़लूक़ हैं, और उनका भी असर अल्लाह ही के हुक्म से होता है. इसलिए सबसे पहला और सबसे मज़बूत तरीका ये है कि घर में हमेशा कुरान की तिलावत होती रहे.
ख़ास तौर से सूरह बकरा की तिलावत, यह शैतानों को ऐसा जलाती है कि वो खुद भाग जाते हैं. हज़रत नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है कि जिस घर में सूरह बकरा पढ़ दी जाए, उस घर से शैतान भाग जाता है. दूसरी बात, घर में अंधेरा न रखें. जहां बिना वजह के अंधेरा और वीरानी होती है, वहां ये चीज़ें ठिकाना बनाती हैं. तीसरी बात, अगर एक घर में रोजाना अज़ान की आवाज़ गूंजे, तो उस घर के अंदर शैतान ठहर ही नहीं सकता. अगर असर कुछ ज्यादा महसूस हो, इंसान बार-बार बीमार पड़े, दवा काम न करे, और किसी भी तरह सुस्त, दबाव, डर या बेचैनी हट न रही हो. तो यह समझ लेना चाहिए कि मामला नेचुरल नहीं है. फिर बेहतर यही है कि किसी सही, ईमानदार, तजुर्बेकार आलिम या मुफ्ती से रुक़या शरीया करवाया जाए. यानी कुरान और दुआओं से इलाज कराया जाये. कुरानी आयतें पढ़कर दम किया जाए, सूरह फ़लक, सूरह नास, आयतुल कुर्सी का विर्द लगातार किया जाए.
इन जगहों पर नहीं आते
मौलाना के मुताबिक, एक बात समझ लें कि अगर घर में गंदी चीज़ें रखी हों, अश्लील तस्वीरें हों, संगीत और फुज़ूल अफ़रातफ़री हो, झगड़े हों, गुस्सा हो. तो ऐसी जगहों को शैतान बहुत पसंद करते हैं. लेकिन जहां कुरान, रोशनी, इबादत, सफाई और सुकून होता है, वह जगह उनका ठिकाना नहीं बनती. यानी इंसान अगर अपने घर को जिंदा घर बनाए. जहां अल्लाह का ज़िक्र हो, नमाज़ और कुरान की तिलावत हो, साफ़ सफाई हो, और लोग आपस में मोहब्बत से रहें. तो जिन्नात का कोई भी बुरा असर वहां क़ायम नहीं रह सकता.







