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प्रसिद्ध हनुमान मंदिर दौसा: दौसा जिला धार्मिक मान्यताओं और बालाजी मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है.मेहंदीपुर बालाजी यहां का प्रमुख तीर्थ है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु भूत-प्रेत बाधा, क्लेश और मानसिक शांति के लिए आते हैं. डंगलाव वाले बालाजी को दौसा का रक्षक माना जाता है और पितरों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए यहां विशेष पूजा होती है. पीलू वाले बालाजी बच्चों की नजर उतारने के लिए प्रसिद्ध हैं. गीजगढ़ का बांकली बालाजी मंदिर नवरात्र मेले के लिए जाना जाता है, जबकि फलसा वाले बालाजी मंदिर मनोवैज्ञानिक शांति से जुड़ा माना जाता है.

दौसा जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में मेहंदीपुर बालाजी भी शामिल है. दौसा जिले के मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में दर्शन करने के लिए राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश और विदेश से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं.मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन कर भक्त पूजा-अर्चना करते हैं.मेहंदीपुर बालाजी आने वाले श्रद्धालु अपने घरेलू क्लेश दूर करने की कामना से यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं. मेहंदीपुर बालाजी में लड्डू का भोग लगाया जाता है और यहां सवामणि का आयोजन भी होता है.यह मंदिर भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाने के लिए प्रसिद्ध है. माना जाता है कि यहां आने वाले भक्तों की बाधाएं बालाजी महाराज दूर करते हैं. इसके अलावा यह मंदिर मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने का भी महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां हर साल लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं.

दौसा सिटी की सीमा पर स्थित डंगलाव वाले बालाजी का मंदिर है. ऐसा बताया जाता है कि डंगलाव वाले बालाजी तब से दौसा की रक्षा करते आ रहे हैं, जब दौसा सिटी विकसित भी नहीं हुई थी. यह मंदिर परिवार के पितरों से जुड़े मामलों के लिए भी विख्यात है. माना जाता है कि यदि किसी परिवार में पितरों से संबंधित कोई परेशानी हो, तो यहां 5 से 7 बार आने पर वह दूर हो जाती है. दौसा की सीमा पर स्थित होने के कारण इन्हें दौसा का रक्षक भी माना जाता है. कहा जाता है कि कोई भी संकट आने से पहले इनसे टकराकर ही आगे बढ़ता था. यहां दशहरा, होली और दीपावली पर श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ रहती है, क्योंकि लोग अपने पितरों को प्रसाद का भोग लगाने आते हैं. इसके अलावा, हर शनिवार और मंगलवार को भी श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं.

दौसा जिला मुख्यालय पर सिटी के अंदर पीलू वाले बालाजी का मंदिर स्थित है. इस मंदिर में शनिवार और मंगलवार को विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है. यहां की मान्यता है कि यदि छोटे-छोटे बच्चों को नजर लग जाती है, तो उन्हें यहां लाकर बालाजी की पूजा-अर्चना की जाती है. ऐसा माना जाता है कि पूजा करने के बाद बच्चों की नजर दूर हो जाती है, इसलिए छोटे बच्चों के लिए यह बालाजी विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं.स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चा चाहे एक दिन का हो या कई सालों का, नजर लगने पर उसे यहां लाया जाता है और बालाजी को बच्चों के साथ धोक लगाई जाती है, जिससे बच्चे ठीक हो जाते हैं. इस मंदिर में नागर पान, लड्डू और लौंग का भोग लगाया जाता है.
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दौसा जिले के गीजगढ़ कस्बे में बांकली बालाजी का मंदिर स्थित है. यहां नवरात्र के दौरान विशेष मेला लगता है और मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचते हैं. यहां के स्थानीय श्रद्धालुओं की मान्यता है कि बालाजी के मंदिर में आकर अगर कोई श्रद्धालु अपनी इच्छा से मन्नत मांगता है तो उसकी बालाजी महाराज मन्नत को पूरी करते हैं. स्थानीय निवासी प्रहलाद शास्त्री ने बताया कि बांकली के बालाजी के दर्जनों की संख्या में पदयात्राएं पहुंचती हैं और जो भी श्रद्धालु यहां आने के बाद बालाजी से इच्छा मांगता हैं, वह खाली हाथ कभी नहीं लौटते हैं.

दौसा सिटी में फलसा वाले बालाजी का मंदिर है. यह दोसा के पीजी कॉलेज से कुछ दूरी पर स्थित है. यहां की मान्यता है कि प्रतिदिन यहां जो श्रद्धालु आते हैंं और पूजा-अर्चना करते हैं, उनके मन को बहुत ही शांति मिलती हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां पर शनिवार और मंगलवार को पूजा-अर्चना करते हैं तो घर परिवार के सदस्यों में चल रहे गृह क्लेश भी दूर हो जाते हैं. यहां पर विशेष बड़े आयोजन भी होते रहते हैं. वही मंदिर का हाल ही में दोबारा से निर्माण भी किया गया है.







