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पुराने कपड़ों में होली खेलना घातक, पीछे पड़ सकती हैं बुरी शक्तियां, मीठा खाकर बाहर निकलना भी खतरनाक, जानें उपाय


देहरादून. दीपावली के त्यौहार की तरह ही होली पर भी नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं और किसी के भी जीवन को यह बर्बाद कर सकती हैं. हमारी छोटी-छोटी गलतियां हमें इन शक्तियों की जद में ला सकती हैं. ऐसे में होली वाले दिन कुछ गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा इनसे पीछे लग जाती है. इस दिन अगर आप तैयार होकर लोगों को आकर्षित करने के लिए परफ्यूम लगाते हैं तो संभल जाएं. इससे कोई और आकर्षित हो न हो, निगेटिव एनर्जी आपकी और खिंची चली आएगी. अगर आप मीठा खाने के बाद बाहर जाते हैं तो भी ठीक नहीं. होली खेलने के दौरान फटे पुराने कपड़ों को पहनने की गलती न करें. यह भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है.

होगा क्या-क्या

देहरादून के ज्योतिषाचार्य योगेश कुकरेती बताते हैं कि होली का त्योहार रंगों, खुशियों और भाईचारे का प्रतीक है, लेकिन आध्यात्मिक और तांत्रिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय नकारात्मक ऊर्जा के दृष्टिकोण से भी बहुत संवेदनशील माना जाता है. पूर्णिमा और अमावस्या पर भी नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है, इसलिए महिलाओं और बच्चों को तो इस वक्त बाहर ऐसी वैसी जगह पर जाने से बचना चाहिए. जिस प्रकार से दिवाली की रात को ‘कालरात्रि’ माना जाता है, उसी तरह होली की रात को ‘महारात्रि’ या ‘सिद्ध रात्रि’ कहा जाता है. कई लोगों का मानना है कि इस दौरान ब्रह्मांड में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह की शक्तियां अपने चरम पर होती हैं. ऐसे में आपकी छोटी सी लापरवाही नकारात्मक ऊर्जाओं को आपकी ओर आकर्षित कर सकती है, जिससे जीवन में मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं.

जाना ही पड़े तब क्या करें

आचार्य कुकरेती बताते हैं कि होली के दिन कई लोग तैयार होकर तेज सुगंध वाले इत्र या परफ्यूम लगाते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, तेज खुशबू नकारात्मक शक्तियों को बहुत जल्दी आकर्षित करती हैं, खासकर सुनसान रास्तों या चौराहों पर जहां उनका बसेरा होता है. ऐसे रास्तों से गुजरना हो तो बिलकुल भी खुशबू का उपयोग न करें. इसी तरह, मीठा खाकर तुरंत घर से बाहर निकलना भी वर्जित माना गया है क्योंकि ‘सफेद मिठाई’ और ‘मीठी ऊर्जा’ को नकारात्मकता का वाहक माना जाता है. इनसे बचने के लिए घर से बाहर निकलने से पहले थोड़ा पानी पी लें या तुलसी का पत्ता मुंह में रख लें.

कई लोग होली खेलने के लिए बहुत पुराने या फटे हुए कपड़े निकाल लेते हैं, यह सोचकर की नए कपड़े खराब न हों, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फटे-पुराने और गंदे कपड़े राहु और दरिद्रता का प्रतीक होते हैं, जो व्यक्ति की आभा को कम कर देते हैं. कमजोर आभा वाले व्यक्ति पर बुरी शक्तियों का प्रभाव जल्दी पड़ता है, इसलिए कोशिश करें कि साफ-सुथरे और साबुत कपड़े पहनने चाहिए. शाम के समय यानी सूर्यास्त के बाद बाल खुले रखकर बाहर न घूमें, क्योंकि यह भी नकारात्मकता को न्योता देने जैसा है.

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि होली और होलिका दहन के आसपास कई तरह के तांत्रिक अनुष्ठान और ‘टोटके’ किए जाते हैं, जो ज्यादातर चौराहों पर रखे मिलते हैं. होली वाले दिन अनजान वस्तुओं को छूना या उन पर पैर रखना भारी पड़ सकता है. अगर आपको रास्ते में कहीं सिंदूर, नींबू, मिठाई या जलता हुआ दीपक दिखाई दे तो उससे दूरी बनाकर चलें. ऐसी चीजों के संपर्क में आने से नकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति के साथ उसके घर तक प्रवेश कर सकती है, जो लंबे समय तक पीछा नहीं छोड़ती है और उसके जीवन को बर्बाद कर सकती है.

क्या और कर सकते हैं

आप होलिका दहन के समय पीली सरसों को मुट्ठी में लेकर सात बार सिर से पैर तक 7 बार उतारकर आग में डाल दीजिए. मन-मस्तिष्क में बुरे विचारों को आने न दीजिए. नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से बचने के आप होलिका दहन की राख को माथे पर तिलक के रूप में लगा सकते हैं. जेब में काले तिल या राई के कुछ दाने रखना भी नजर दोष से बचा जा सकता है. सबसे जरूरी बात है कि अपनी मानसिक शक्ति को मजबूत रखें और भगवान का स्मरण करते रहें, क्योंकि सकारात्मक विचार और दृढ़ संकल्प किसी भी बाहरी नकारात्मकता को आप पर हावी नहीं होने देते हैं.

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