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Bokaro Top 5 Shiva Mandir : वैसे तो शिवरात्रि के अवसर पर शिवभक्त धूमधाम से पूजा करते हैं. ऐसे में आज हम आपको बोकारो जिले के 5 फेमस शिव मंदिर के बारे में बताने वाले हैं. जहां पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है.

शिवरात्रि का पर्व हर साल बोकारो में श्रद्धा और आस्था के साथ बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है जहां जिले के प्रसिद्ध शिवालय और शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है ऐसे में आज बोकारो के पांच प्रसिद्ध शिव मंदिर के बारे में जानेंगे जहां दुर दराज से लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं

बोकारो के सेक्टर 12 में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर अपनी अनोखी बनावट और विशाल आकार के शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है. जहां महाशिवरात्रि और सावन महीने में भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है. इस मंदिर के ऊपर 30 फीट ऊंचा शिवलिंग स्थापित है, जिसे देखने दुर-दुर से लोग आते हैं. इस मंदिर का निर्माण 2001 में हुआ था और मंदिर के अंदर शिवलिंग के साथ भगवान शिव परिवार की मूर्तियां भी स्थापित हैं.

बोकारो के चास प्रखंड के कुमहरी पंचायत में स्थित चेचका धाम बोकारो के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में से एक है. जहां 19 से भी अधिक मंदिर जैसे शिव पार्वती, हनुमान, शीतला मां ,काल भैरव और अन्य मंदिर स्थापित हैं. इस स्थल पर भगवान विष्णु के पदचिन्ह , शंख, चक्र और गदा के निशान सबसे अनोखा बनती है, जिसे स्थानीय लोगों मे गहरी आस्था है
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वहीं, चेचका धाम मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोगों के मान्यता अनुसार चेचका धाम में भगवान विष्णु जी द्वारा शिवलिंग की स्थापना की गई थी और वर्षों बाद मंदिर की पुरोहित के स्वपन में भगवान शिव आकर उन्हें शिवलिंग में पूजा अर्चना करने की आज्ञा दिए थे. तभी से चेचका धाम मंदिर में स्थापित शिवालय बहुत ही प्रसिद्ध है. यहां दूर-दूर से लोग शिवरात्रि, सावन और सोमवार को जल चढ़ाने आते हैं.

बोकारो के चास प्रखंड के नारणपुर में स्थित जरुआटाड़ बूढ़ा बाबा मंदिर विशेष रूप से मनोकामना शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है. क्योंकि, इस मंदिर से रहस्यमई कथा भी जुड़ी हुई है. मंदिर के पुजारी के अनुसार 17वीं सदी के दोरान इस स्थान पर घाना जंगल हुआ करता था. एक दिन एक लोहार शिवलिंग को पत्थर समझकर इसी पर अपने औजार तेज कर रहा था तभी पत्थर पर लगातार चोट पड़ने से अचानक दूध की धारा फूट पड़ी. यह देख लोहार हैरान रह गया. दूध की धारा इतनी तेज थी कि सामने स्थित तालाब मिनटों में भर गया.

तभी इस घटना से आसपास के इलाके में हलचल मच गई. कुछ दिनों बाद काशीपुर के राजा को भगवान शिव ने सपने में दर्शन दिया. भगवान शिव ने राजा को आदेश दिया कि वे शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए हैं. इसके बाद राजा ने बनारस से पंडित बुलाकर यहां पर पूजा-अर्चना शुरू कराई. तभी से यहां बूढ़ा बाबा मंदिर में भगवान शंकर की आराधना हो रही है.

बोकारो जिले के चास में स्थित बूढ़ा बाबा धाम प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. शिवरात्रि, सावन मास और प्रत्येक सोमवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. यह मंदिर चास वासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. और स्थानीय लोगों की मान्यता अनुसार सच्चे मन से पूजा करने पर मनचाहा वर या वधू की प्राप्ति होती है.

वहीं, मंदिर के पुजारी विजय शास्त्री ने बताया कि इस मंदिर का इतिहास 200 वर्षों से भी अधिक पुराना है. यहां विराजमान शिवलिंग स्वयंभू शंकर हैं. यानी भगवान शिव स्वयं यहां प्रकट हुए थे. बीते कई वर्षों से इस मंदिर में पूजा-अर्चना होती आ रही है. करीब 80 साल पहले यहां एक पक्के मंदिर का निर्माण किया गया था.

बोकारो चास प्रखंड के डूमर जोड़ में स्थित बाबा भूतनाथ मंदिर भी प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है. जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं. यह मंदिर विशेष तौर पर गाड़ी पूजन के लिए भी जाना जाता है. शिवरात्रि पर यहां भव्य शिव बारात और झांकियों निकाली जाती है.

वहीं, भूतनाथ मंदिर के रहस्य के बारे में पुजारी बाबा बनवारी लाल का कहना है कि इस अद्भुत शिवलिंग के नीचे बाबा मगधदास की समाधि है. यह बाबा भूतनाथ द्वारा स्थापित किया गया था. वह एक अघोरी संत थे. उन्होंने राजस्थान के जयपुर से झारखंड आकर श्मशान घाट में उन्होंने तपस्या की थी. फिर बाबा ने छोटी सी कुटिया पर छोटा सा मंदिर बनाया. तभी से यह बाबा भूतनाथ के नाम से प्रसिद्ध है.







