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14 अप्रैल से मलमास समाप्ति के बाद विवाह आयोजनों का पहला चरण शुरू होगा, जो 6 जुलाई तक चलेगा. इस दौरान 22 सावे और 5 अबूझ सावे होंगे. 14 जून को गुरु अस्त से मांगलिक कार्य रुकेंगे.
मांगलिक कार्यों का ये फेज 6 जुलाई तक चलेगा
हाइलाइट्स
- मलमास के बाद शादियों की शहनाई शुरू.
- 6 जुलाई तक मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त रहेंगे.
- 14 जून को गुरु अस्त से मांगलिक कार्य रुकेंगे.
जयपुर. मलमास के बाद एक बार फिर से शादियों की शहनाईयो की गूंज शुरू हो गई है. आज से फिर वैवाहिक आयोजन शुरू हो जाएंगे. नव संवत्सर के बाद शुरू होने वाले विवाह आयोजनों के पहले फेज में 22 सावे तो मुहूर्त के हिसाब से और 5 अबूझ सावे होंगे. इस बार दोष रहित 10 रेखा 2 सावे रहेंगे. इसके अलावा 9 रेखा के 2 सावे, 8 रेखीय 6 सावे और 7 रेखा के 8 सावों पर वैवाहिक आयोजन हो सकेंगे मांगलिक कार्यों का ये फेज 6 जुलाई तक चलेगा, इसके बाद देवता शयन में चले जाएंगे.
आज समाप्त हो जाएगा मलमास
धर्म विशेषज्ञ चंद्रप्रकाश ढांढण ने बताया कि 14 अप्रैल को ग्रहों के राजा सूर्य देव राशि परिवर्तन कर रहे हैं. वे मीन राशि को छोड़कर अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश कर रहे हैं, जिसके साथ ही मीन मलमास समाप्त हो जाएगा. इसी के साथ नव संवत्सर के बाद वैवाहिक मांगलिक आयोजनों का पहला चरण शुरू होगा, जो 6 जुलाई तक चलेगा. इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, गृहारंभ, यज्ञोपवीत, नवीन कार्य प्रारंभ जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी. पहला सावा 14 अप्रैल का सात रेखीय रहेगा. इसके अलावा 14 जून को गुरु अस्त होंगे.
जारी रहेंगे मांगलिक कार्य
धर्म विशेषज्ञ चंद्रप्रकाश ढांढण ने बताया कि 14 जून को गुरु अस्त अर्थात् तारा लग जाएगा, जिससे एक बार फिर मांगलिक कार्य रुक जाऐगे. गुरु अस्त 7 जुलाई तक रहेगा. इसमें कुछ अबूझ सावे हैं जिनमें मांगलिक कार्य होंगे. 4 जुलाई को भड़ल्या नवमी का रहेगा. इसके दो दिन बाद यानी 6 जुलाई को देव शयनी एकादशी अबूझ मूहुर्त होगा, जिसके साथ ही देवता शयन पर चले जाएंगे और विवाह आदि मांगलिक कार्यों पर पुनः विराम लग जाएगा. इसके बाद मांगलिक आयोजनों का दूसरा चरण 1 नवंबर को देव प्रबोधिनी यानी देव उठनी एकादशी से ही शुरू होगा.







