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Mahakumbh Mela 2025: महाकुंभ हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण आयोजन है जहां लाखों श्रद्धालु मोक्ष प्राप्ति की कामना से पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. मोक्ष, जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति है. विभिन्न धर्मों में मोक्ष की अवधारणा अलग-अलग नामों से मौजूद है, जैसे बौद्ध…और पढ़ें
मोक्ष एक ऐसा शब्द है जो हिंदू धर्म और भारतीय दर्शन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है.
हाइलाइट्स
- महाकुंभ में स्नान से मोक्ष की प्राप्ति
- मोक्ष जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति है
- विभिन्न धर्मों में मोक्ष की समान अवधारणाएं
Mahakumbh Mela 2025: महाकुंभ हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है और इसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं. प्रयागराज में संगम तट पर महाकुंभ की भव्य शुरुआत हो चुकी है. 13 जनवरी को इस महाकुंभ का पहला अमृत स्नान था. यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है. यह हर 12 साल पर आयोजित किया जाता है. मान्यता है कि महाकुंभ में विशेष तिथियों पर पवित्र नदियों (त्रिवेणी, यानी गंगा, यमुना और सरस्वती, जो दृश्य हैं) में स्नान करने से आध्यात्मिक शुद्धि, पापों का प्रायश्चित, पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसलिए महाकुंभ में इन तिथियों पर होने वाले स्नान को अमृत स्नान कहा जाता है.
मोक्ष का मतलब है, जीवन, मृत्यु, और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति, जहां आत्मा ब्रह्म या परमात्मा में लीन हो जाती है. यह हिंदू धर्म में व्यक्ति का अंतिम लक्ष्य होता है. मोक्ष शब्द संस्कृत के शब्द ‘म्यूक’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है मुक्त होना. मोक्ष को निर्वाण के नाम से भी जाना जाता है. मोक्ष एक ऐसा शब्द है जो हिंदू धर्म और भारतीय दर्शन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है. यह एक ऐसी अवस्था है जिसे आत्मज्ञान, मुक्ति या परमानंद के रूप में भी जाना जाता है.
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अन्य धर्मों में मोक्ष के समान अवधारणाएं
हालांकि मोक्ष शब्द हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ है, लेकिन अन्य धर्मों में भी इसी तरह की अवधारणाएं पाई जाती हैं. ये अवधारणाएं भले ही अलग-अलग नामों से जानी जाती हों, लेकिन उनके मूल तत्व समान होते हैं.
कुछ उदाहरणों पर नज़र डालते हैं-
बौद्ध धर्म: बौद्ध धर्म में मोक्ष को निर्वाण कहा जाता है. यह भी एक ऐसी अवस्था है जहां व्यक्ति दुख और कर्मों के बंधन से मुक्त हो जाता है.
जैन धर्म: जैन धर्म में मोक्ष को मोक्ष या कैवल्य कहा जाता है. यह भी जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की अवस्था है.
सिख धर्म: सिख धर्म में मोक्ष को एकता या परमात्मा के साथ मिलन के रूप में देखा जाता है.
ईसाई धर्म: ईसाई धर्म में स्वर्ग को मोक्ष के समान माना जा सकता है, जहां आत्मा परमात्मा के साथ एकता प्राप्त करती है.
इस्लाम: इस्लाम में जन्नत को मोक्ष के समान माना जा सकता है, जहां विश्वासी ईश्वर के साथ अनंत सुख का आनंद लेते हैं.
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विभिन्न धर्मों में मोक्ष प्राप्त करने के मार्ग
विभिन्न धर्मों में मोक्ष प्राप्त करने के मार्ग अलग-अलग हो सकते हैं. कुछ सामान्य मार्ग इस प्रकार हैं-
ज्ञान: ज्ञान के माध्यम से आत्मा की प्रकृति को समझना और ब्रह्म या परमात्मा के साथ अपने संबंध को जानना.
भक्ति: भगवान या परमात्मा के प्रति प्रेम और भक्तिभाव रखना.
कर्म: अच्छे कर्म करके पुण्य अर्जित करना और पापों से बचना.
योग: शरीर और मन को नियंत्रित करके आत्मज्ञान प्राप्त करना.
ध्यान: ध्यान के माध्यम से मन को शांत करके आंतरिक शांति प्राप्त करना.
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मोक्ष एक सार्वभौमिक अवधारणा है जो विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों में पायी जाती है. यह एक ऐसी अवस्था है जिसे हर व्यक्ति हासिल करना चाहता है. हालांकि, मोक्ष प्राप्त करने के मार्ग और तरीके अलग-अलग हो सकते हैं.
कब हैं महाकुंभ में शाही स्नान
महाकुंभ में सबसे महत्वपूर्ण घटना शाही स्नान है. इसमें विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत पवित्र नदी में स्नान करते हैं. 13 जनवरी को महाकुंभ की शुरुआत के बाद अगले ही दिन मकर संक्रांति को पहला शाही स्नान था. अभी तीन और शाही स्नान बाकी हैं. 29 जनवरी को पड़ने वाली मौनी अमावस्या के दिन दूसरा शाही स्नान होगा. तीसरा शाही स्नान तीन 3 फरवरी को पड़ने वाली बसंत पंचमी के दिन होगा. आखिरी शाही स्नान 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन होगा. इसी दिन महाकुंभ का समापन होगा.
New Delhi,Delhi
January 16, 2025, 19:17 IST
महाकुंभ में स्नान से मिलता है मोक्ष, दूसरे धर्मों में इसका क्या मतलब






