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हर 12 वर्ष के अंतराल पर महाकुंभ का आयोजन होता है. ज्योतिष के अनुसार, देव गुरु बृहस्पति प्रत्येक राशि में यानी मेष से मीन तक गोचर करने में 12 साल का समय लगाते हैं. इस वजह से ही हर 12 साल पर महाकुंभ का आयोजन होता है. अमृत के लिए देवों और असुरों में 12 दिनों तक युद्ध हुआ था, जो मृत्यु लोक के 12 साल के बराबर होता है. छीना-झपटी के बीच अमृत कलश से कुछ बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी थीं, इसलिए इन 4 जगहों पर ही कुंभ का आयोजन है.







