द्रौपदी ने इसके लिए बहुत दिनों तक अर्जुन को माफ नहीं किया, वह क्रोध में भरी रहींउन्होंने इसे खुद के साथ धोखा माना और ये माना कि अर्जुन ने दूसरी शादी करके विश्वासघात कियाहालांकि बाद में द्रौपदी को पांडवों की अन्य शादियों के बाद उनकी पत्नियों को भी अपनाना पड़ा
अर्जुन ने जब स्वयंवर में द्रौपदी को वरण किया तो कुछ ऐसे हालात बने कि उन्हें पांचों पांडव भाइयों की पत्नी बनना पड़ा. द्रौपदी ने इस हालत के साथ भी किसी तरह समझौता कर लिया लेकिन तब वह तिलमिला गईं जब अर्जुन ने उसके बाद तीन शादियां कीं. खासतौर पर वह सुभद्रा को ब्याह करके घर ले आए. तब वह गुस्से से बिफर उठीं. अर्जुन को बुरी तरह लताड़ा. आखिर क्यों द्रौपदी को अर्जुन का शादी करके सौत को घर लाने कतई पसंद नहीं आय़ा.
ये बात सही है कि पांडव परिवार में पहला विवाह तब हुआ जबकि अर्जुन ने स्वयंवर में ब्राह्णण के वेश में मछली की आंख में तीर चलाकर द्रौपदी को स्वयंवर में जीता. ऐसे में द्रौपदी को कायदे से तो अर्जुन की ही पत्नी होना चाहिए था लेकिन कुंती ने अनजाने में ऐसी बात कही कि उसे पांचों पांडवों की पत्नी बनना पड़ा. जो उस समय के लिहाज से भी बहुत विचित्र बात थी.
कहा जाता है कि बेशक इसके बाद द्रौपदी को पांचों पांडवों के साथ खुद को बांटना पड़ा लेकिन शायद उसका सबसे ज्यादा अनुराग अर्जुन के साथ था. ऐसे में तब द्रौपदी बहुत नाराज हो गईं जबकि अर्जुन ने बाद में अन्य विवाह किए.
जब वनवास के दौरान अर्जुन ने युधिष्ठिर-द्रौपदी के मिलन के दौरान शर्त तोड़ी. वह उनके कमरे में घुस गए तो खुद को सजा देते हुए 12 वर्ष का वनवास ले लिया.
कैसे अर्जुन ने वनवास में तीन विवाह किये
इसी दौरान उलूपी उनके प्रेम में पड़ीं. अर्जुन ने उससे विवाह रचाया. जब अर्जुन ने उलूपी से शादी करने के बाद उन्हें उनके ही राज्य में छोड़कर आगे तीर्थयात्रा शुरू की तो मणलूर राज्य में चित्रवाहन नाम के राजा की पुत्री चित्रांगदा को देखते ही सुधबुध खो बैठे. वो उसके प्रेम में पड़े. सीधे राजा के पास जाकर चित्रांगदा का हाथ मांग लिया. वहां उन्होंने उससे विवाह किया. तीन साल तक साथ रहे. चित्रांगदा उस समय पिता का राज्य नहीं छोड़ सकती थी, लिहाजा अर्जुन आगे बढ़ गए.
इसके बाद अर्जुन प्रभास क्षेत्र में पहुंचे. उनकी मुलाकात कृष्ण से हुई. उनकी नजर कृष्ण की सौतेली बहन सुभद्रा पर पड़ी. वह उससे भी प्यार कर बैठे. कृष्ण की ही सलाह पर उसे हरण कर ले गए और ब्याह रचा लिया.
जब द्रौपदी को मालूम हुआ कि अर्जुन ने पांडवों से अलग जाकर 12 वर्ष तक वनवास में रहने के दौरान तीन शादियां कर लीं और वह कृष्ण की सौतेली बहन सुभद्रा को ब्याह करके घर ला रहे हैं तो वह भावनात्मक तौर पर काफी आहत हो गईं. (Image generated by Leonardo AI)
जब वह सुभद्रा से शादी करके उसको साथ लेकर घर लौटे तो द्रौपदी को सारी बात पता चल चुकी थी कि किस तरह अर्जुन ने अकेले वनवास के दौरान तीन शादियां कर रचाईं. सुभद्रा को तो वह घर लेकर आ रहे हैं. हालांकि उलूपी और चित्रांगदा भी बाद में हस्तिनापुर आ गईं.
तब द्रौपदी बुरी तरह क्रोधित थीं
जब अर्जुन सुभद्रा को लेकर घर लौटे तो द्रौपदी बिफरी हुईं थीं. तिलमिलाई हुई थीं. बुरी तरह क्रोधित. अर्जुन पर नाराजा. महसूस कर रही थीं कि उनके साथ विश्वासघात हुआ है. अर्जुन ने ऐसा करके वचन तोड़ा है. वह इतनी नाराज थीं कि अर्जुन के सामने आने से इनकार कर दिया. भावनात्मक तौर पर द्रौपदी के मन में उथलपुथल मची हुई थी.
क्यों द्रौपदी ने विश्वासघात महसूस किया
द्रौपदी को सुभद्रा से विवाह करने के अर्जुन के निर्णय से विश्वासघात इसलिए महसूस हुआ, क्योंकि जब वह शादी करके पांडवों के घर में आईं थीं तो उन्होंने पहले ही ये शर्त रखी थी कि अब उनके अलावा कोई अन्य महिला भाइयों के साथ घर में नहीं रहेगी. पर ये वचन तो उसी शख्स ने तोड़ दिया, जिसे वो सबसे ज्यादा चाहती थीं. बाद में अन्य पांडव भाइयों ने भी इस वचन को चकनाचूर किया. द्रौपदी क्रोध में कांपती रहीं. अर्जुन पर वादा तोड़ने का आरोप लगाया.
वह क्रोध से भर उठी थीं
अर्जुन ने उनकी अपेक्षाओं को तोड़ा तो दिल पर गहरी चोट लगी. मन आक्रोश से भरा हुआ था. उनका मानना था कि अर्जुन के साथ उनका बंधन खास और अभिन्न है. अब वह भावनात्मक पीड़ा अनुभव कर रही थीं. उन्होंने हमेशा अर्जुन का पक्ष लिया. उन्हें पांडवों में अपना सबसे करीबी माना.
जब अर्जुन ने सुभद्रा का हरण करके उनसे शादी और उन्हें साथ लेकर घर लौटे तो द्रौपदी लंबे समय तक उनसे नाराज रहीं. सुभद्रा से भी वह खिन्न रहती थीं. (Image generated by Leonardo AI)
द्रौपदी को क्यों लगा कि वह तबाह हो गईं
अब अर्जुन दूसरी पत्नी के तौर पर सुभद्रा को साथ लेकर लौटे. दूसरी पत्नी के साथ अर्जुन को बांटना कष्टदायक था. उन्हें ये भी लगा कि इससे परिवार के भीतर उनकी सुरक्षा और स्थिति को खतरा हो गया. द्रौपदी को बड़े नुकसान का एहसास हुआ. कहां वह अर्जुन से 12 सालों तक अलग रहने की वजह से उनके लिए तड़पती थीं. अब तो अर्जुन ने इससे कहीं ज्यादा पीड़ा से भर दिया.
द्रौपदी मजबूत चरित्र की थीं. जबरदस्त दृढ़ता वाली स्त्री. वह किसी भी मुद्दे पर चुप नहीं रहती थीं तुरंत मुखर होती थीं. उन्होंने अर्जुन को गुस्से में खूब भला-बुरा कहा. इससे ज्यादा क्या करतीं.
कैसे फिर सुभद्रा को अपनाया
अर्जुन जब भी द्रौपदी को मनाने की कोशिश करते, वह रूठकर कहतीं- सुभद्रा के पास ही जाओ. तब केवल अर्जुन के साथ सुभद्रा ने भी द्रौपदी से याचना की, मनाया. सुभद्रा को कहना पड़ा – मैं तुम्हारी दासी हूं. शायद इससे द्रौपदी का गुस्सा हल्का पड़ा. उन्होंने तब सुभद्रा को अपनाया.
बेशक द्रौपदी लंबे समय तक अर्जुन से नाराज रहीं लेकिन उन्होंने किसी तरह उन्हें मनाया. फिर सुभद्रा और द्रौपदी के बीच रिश्ते सामान्य हो पाए. (Image generated by Leonardo AI)
व्यास की “महाभारत” में द्रौपदी को स्थिति को शालीनता से संभाला गया है. हालांकि उन्होंने अर्जुन को तुरंत माफ़ नहीं किया. बाद में द्रौपदी और सुभद्रा अच्छी सहेलियां बन गईं. बहनों की तरह एक-दूसरे से जुड़ गईं.
द्रौपदी सुभद्रा और अर्जुन के बेटे अभिमन्यु को अपने बच्चे की तरह प्यार करती थी. जब पांडव पांसे का खेल हारने के बाद वनवास पर चले गए, तो सुभद्रा ने द्रौपदी के बच्चों की देखभाल की.
बाद में पांडवों की अन्य पत्नियों के साथ तालमेल किया
बाद में युधिष्ठिर से लेकर दूसरे पांडवों मसलन भीम, नकुल और सहदेव सभी ने शादियां कीं लेकिन दूसरे पांडव भाइयों की शादियों पर द्रौपदी ने उस तरह से नाराजगी नहीं जाहिर की. द्रौपदी का दर्जा हमेशा मुख्य रानी का बना रहा. जब युधिष्ठिर महाभारत का युद्ध होने के बाद राजा बने तो मुख्य रानी होने के नाते द्रौपदी उनके साथ सिंहासन पर बैठती थीं.
सभी पांडव पत्नियों से रिश्ते बेहतर हो गए
समय के साथ द्रौपदी के रिश्ते अर्जुन की अन्य पत्नियों उलूपी और चित्रांगदा से बेहतर हो गए. सभी उन्हें समुचित सम्मान देती थीं. उन्होंने पांडवों की सभी पत्नियों को विस्तारित परिवार के हिस्से के रूप में स्वीकार किया. ठीक उसी तरह जैसे अर्जुन की शादी के बाद सुभद्रा को स्वीकार किया.
युद्ध के बाद 15 वर्षों तक द्रौपदी और अन्य पांडव पत्नियों ने मिलकर हस्तिनापुर में अंधे राजा धृतराष्ट्र और उनकी पत्नी गांधारी की देखभाल की. जब पांडव हिमालय की अपनी अंतिम यात्रा पर निकले, तो द्रौपदी उनके साथ चली गईं, कुछ अन्य पत्नियां वहीं रुक गईं. सुभद्रा राजमाता के रूप में राज्यों का मार्गदर्शन करने के लिए रुकीं.
FIRST PUBLISHED : September 11, 2024, 13:20 IST
