Saturday, February 28, 2026
27 C
Surat
[tds_menu_login inline="yes" guest_tdicon="td-icon-profile" logout_tdicon="td-icon-log-out" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNiIsIm1hcmdpbi1ib3R0b20iOiIwIiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyNSIsImRpc3BsYXkiOiIifSwicG9ydHJhaXQiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiMiIsIm1hcmdpbi1sZWZ0IjoiMTYiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsImxhbmRzY2FwZSI6eyJtYXJnaW4tcmlnaHQiOiI1IiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyMCIsImRpc3BsYXkiOiIifSwibGFuZHNjYXBlX21heF93aWR0aCI6MTE0MCwibGFuZHNjYXBlX21pbl93aWR0aCI6MTAxOX0=" icon_color="#ffffff" icon_color_h="var(--dark-border)" toggle_txt_color="#ffffff" toggle_txt_color_h="var(--dark-border)" f_toggle_font_family="global-font-2_global" f_toggle_font_transform="uppercase" f_toggle_font_weight="500" f_toggle_font_size="13" f_toggle_font_line_height="1.2" f_toggle_font_spacing="0.2" ia_space="0" menu_offset_top="eyJhbGwiOiIxNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTIiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMyJ9" menu_shadow_shadow_size="16" menu_shadow_shadow_color="rgba(10,0,0,0.16)" f_uh_font_family="global-font-1_global" f_links_font_family="global-font-1_global" f_uf_font_family="global-font-1_global" f_gh_font_family="global-font-1_global" f_btn1_font_family="global-font-1_global" f_btn2_font_family="global-font-1_global" menu_uh_color="var(--base-color-1)" menu_uh_border_color="var(--dark-border)" menu_ul_link_color="var(--base-color-1)" menu_ul_link_color_h="var(--accent-color-1)" menu_ul_sep_color="#ffffff" menu_uf_txt_color="var(--base-color-1)" menu_uf_txt_color_h="var(--accent-color-1)" menu_uf_border_color="var(--dark-border)" show_version="" icon_size="eyJhbGwiOjIwLCJwb3J0cmFpdCI6IjE4In0=" menu_gh_color="var(--base-color-1)" menu_gh_border_color="var(--dark-border)" menu_gc_btn1_color="#ffffff" menu_gc_btn1_color_h="#ffffff" menu_gc_btn1_bg_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn1_bg_color_h="var(--accent-color-2)" menu_gc_btn2_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn2_color_h="var(--accent-color-2)" f_btn2_font_size="13" f_btn1_font_size="13" toggle_hide="yes" toggle_horiz_align="content-horiz-center" menu_horiz_align="content-horiz-center" f_uh_font_weight="eyJsYW5kc2NhcGUiOiI3MDAiLCJhbGwiOiI3MDAifQ==" f_gh_font_weight="700" show_menu="yes" avatar_size="eyJhbGwiOiIyMiIsImxhbmRzY2FwZSI6IjIxIiwicG9ydHJhaXQiOiIxOSJ9" page_0_title="My Articles" menu_ul_sep_space="0" page_0_url="#"]

सूर्यकुंड धाम हजारीबाग झारखंड धार्मिक स्थल और गर्म जल कुंड का महत्व.


हजारीबाग : झारखंड में हजारीबाग जिले के बरकट्ठा प्रखंड में स्थित सूर्यकुंड धाम न केवल एक प्रमुख धार्मिक स्थल है. बल्कि यह पर्यटन की दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है. वर्षों से सूर्यकुंड धाम श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है. इससे जुड़ी मान्यताएं दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं. झारखंड ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

यहां मौजूद हैं 5 गर्म जल कुंड

सूर्यकुंड धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहां मौजूद पांच गर्म जल कुंड हैं. मान्यता है कि इन गर्म जल कुंडों के जल से स्नान करने और जल का सेवन करने से 36 प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं. इसी कारण यहां हर मौसम में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. खासकर त्वचा रोग से पीड़ित लोग बड़ी आस्था के साथ सूर्यकुंड धाम पहुंचते हैं और गर्म जल कुंड में स्नान करते हैं.

आंवला पूजा की है अनोखी मान्यता

इस धार्मिक स्थल से आंवला पूजा की भी विशेष मान्यता जुड़ी हुई है. सूर्यकुंड धाम में अपनी मन्नत मांगने के लिए बड़ी संख्या में लोग आंवला पूजा करवाते हैं. आंवला संकल्प करवाने के लिए यहां रोजाना सैकड़ों भक्त पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई आंवला पूजा से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है. यही कारण है कि सुबह से लेकर शाम तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रहती है.

वहीं, यहां के स्थानीय पुजारी बाबा पीयूष पांडे ने बताया कि सूर्यकुंड धाम में आंवला पूजा का विशेष महत्व है. उन्होंने कहा कि रामायण काल से ही सूर्यकुंड धाम का अस्तित्व माना जाता है. इसकी स्थापना स्वयं प्रभु श्रीराम ने की थी. यहां आंवला संकल्प की एक अनोखी परंपरा है, जिसे निभाने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं. इस संकल्प में भक्त सबसे पहले आंवला खरीद कर लाते हैं और पुजारी द्वारा विधि-विधान से उसकी पूजा करवाई जाती है. इसके बाद भक्त अपनी मन्नत मांगते हुए आंवले का संकल्प करते हैं.

संतान प्राप्ति के मन्नत के लिए आते हैं भक्त

यहां पूजा के बाद उस आंवले को सूर्यकुंड के गर्म जल में फेंक दिया जाता है. मान्यता है कि अगर आंवला एक मिनट के भीतर पानी से बाहर आ जाता है तो भक्त को इसे सेवन के लिए इसे दे दिया जाता है, जिसके बाद भक्तों की मुराद पूरी हो जाती है. सबसे अधिक संतान प्राप्ति के लिए लोग यहां पहुंचते है. इसी आस्था के चलते लोग बार-बार सूर्यकुंड धाम की यात्रा करते हैं और अपनी मन्नत पूरी होने पर धन्यवाद देने भी पहुंचते हैं.

धार्मिक आस्था का बना है बड़ा केंद्र

सूर्यकुंड धाम में कुल पांच गर्म जल कुंड मौजूद हैं, लेकिन मुख्य पूजा-अर्चना सूर्यकुंड में ही की जाती है. सूर्यकुंड को एशिया का सबसे गर्म जल कुंड माना जाता है. इसका तापमान पूरे साल करीब 88.5 डिग्री सेल्सियस बना रहता है. सबसे खास बात यह है कि कड़ाके की ठंड हो या भीषण गर्मी, सूर्यकुंड के तापमान में किसी तरह का बदलाव नहीं होता है. यही वजह है कि यह स्थान वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

Hot this week

कब्ज के कारण और प्राकृतिक उपाय जानें, पेट साफ रखने के लिए जरूरी टिप्स.

कब्ज आजकल की लाइफस्टाइल से जुड़ी एक आम...

Protein Rich Indian Breakfast। हाई-प्रोटीन वाला पोहा रेसिपी

High Protein Poha Recipe: सुबह का नाश्ता दिन...

Topics

Protein Rich Indian Breakfast। हाई-प्रोटीन वाला पोहा रेसिपी

High Protein Poha Recipe: सुबह का नाश्ता दिन...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img