देवघर : ग्रहण भले ही विज्ञान की नजर में एक खगोलीय घटना हो, लेकिन ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व माना जाता है. चाहे चंद्रग्रहण हो या सूर्यग्रहण. दोनों ही स्थितियों में नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव बढ़ने की बात कही जाती है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहण काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए. क्योंकि इसका असर मानव जीवन पर विपरीत पड़ सकता है. ऐसे में फरवरी महीने में लगने वाले सूर्यग्रहण को लेकर लोगों के मन में कई सवाल है तो आप उसे देवघर के ज्योतिषचार्य से सब कुछ जान सकते हैं.
जानें क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल बताते हैं कि साल 2026 का पहला सूर्यग्रहण 17 फरवरी को लगने जा रहा है. यह एक आंशिक सूर्यग्रहण होगा. ज्योतिषाचार्य के अनुसार ग्रहण काल समाप्त होने के बाद स्नान, जप-तप और दान-पुण्य करने की परंपरा शास्त्रों में बताई गई है. ऐसा करने से ग्रहण के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. उन्होंने यह भी बताया कि ग्रहण से पहले लगने वाले सूतक काल को अशुभ माना जाता है. इस दौरान किसी भी तरह के मांगलिक या शुभ कार्य करने की मनाही होती है.
जानें क्या पड़ेगा इसका प्रभाव
ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसलिए इसका ज्योतिषीय प्रभाव भी भारत पर नहीं पड़ेगा. यह ग्रहण अर्जेंटीना, चिली, दक्षिण अफ्रीका और अंटार्कटिका जैसे देशों में दिखाई देगा.
क्या भारत में सूतक काल होगा मान्य?
शास्त्रों के अनुसार सूर्यग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है. इस समय पूजा-पाठ, भोजन पकाना और ग्रहण करना वर्जित माना जाता है. इस दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं और भगवान की प्रतिमा को स्पर्श नहीं किया जाता है. हालांकि सूतक काल तभी मान्य होता है. जब ग्रहण भारत में दिखाई दे. क्योंकि यह सूर्यग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा. इसलिए यहां सूतक काल भी मान्य नहीं रहेगा.
जानें ग्रहण का समय क्या रहेगा?
17 फरवरी 2026 को यह सूर्यग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट 6 सेकंड पर शुरू होगा, शाम 5 बजकर 41 मिनट 9 सेकंड पर इसका मध्य होगा और शाम 7 बजकर 57 मिनट 6 सेकंड पर मोक्षकाल रहेगा. इस ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 31 मिनट होगी.
जानें ग्रहण के दिन क्या-क्या न करें?
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि भले ही यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा हो, फिर भी यह एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है. इस दिन तामसिक भोजन से बचना चाहिए. ग्रहण काल में सोना नहीं चाहिए और पूजा-पाठ या हवन जैसे कार्य नहीं करने चाहिए. संयम और सकारात्मक सोच के साथ दिन बिताना ही सबसे बेहतर माना जाता है.







