वडोदरा के फतेगंज इलाके में स्थित ईएमई मंदिर का निर्माण वर्ष 1966 में किया गया था. यह मंदिर ईएमई रोड पर स्थित है और इसे ईएमई स्कूल के तत्कालीन क्रिश्चियन कमांडेंट, ब्रिगेडियर ए.एफ. यूजीन के निर्देशन में बनाया गया था. मंदिर की योजना, रूपरेखा और निर्माण उनके ही नेतृत्व में हुआ. ईएमई मंदिर अपनी अनोखी और आधुनिक वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है.
धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक
यह मंदिर भारत के 5 प्रमुख धर्मों का प्रतिनिधित्व करता है और धर्मनिरपेक्षता की भावना को उजागर करता है. मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि इसमें प्रत्येक धर्म के मुख्य पहलुओं को शामिल किया गया है. मंदिर का ऊपरी हिस्सा, जिसे ‘कलश’ कहा जाता है, हिंदू धर्म का प्रतीक है. इस्लामी वास्तुकला के अनुसार बना गुंबद इस्लाम का प्रतिनिधित्व करता है. मंदिर की मीनार, जिसमें दक्षिणामूर्ति (भगवान शिव) का स्थान है, ईसाई धर्म को दर्शाती है. वहीं, मीनार का शीर्ष, जो सोने से बना है, बौद्ध धर्म का प्रतीक है. मंदिर का प्रवेश द्वार जैन धर्म की परंपरा को दर्शाता है, जबकि अग्नि पारसी धर्म का प्रतीक है.
मूर्तियों का अनोखा संग्रह
मंदिर में भगवान शिव मुख्य देवता हैं. यहां महाबलीपुरम, तमिलनाडु से लाई गई भगवान गणेश की मूर्ति भी स्थापित है. भगवान शिव की पीठ पर एक शुद्ध चांदी का मेहराब बना हुआ है, जिस पर “ओम नमः शिवाय” अंकित है. मूर्ति का मुख दक्षिण दिशा की ओर है. इसके अलावा, मंदिर परिसर में पवित्र अमरनाथ मंदिर की हूबहू प्रतिकृति मौजूद है. मंदिर में 7वीं से 12वीं शताब्दी के पुराने देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं.
हरियाली और शांति का स्थल
ईएमई मंदिर एक हरे-भरे और शांत वातावरण में स्थित है. यहां आने पर आप सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं. मंदिर का शांत माहौल मन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करता है.
मंदिर की व्यवस्था और नियम
यह स्थान भारतीय सेना द्वारा संचालित और संरक्षित है. मंदिर सुबह 5:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है. यहां प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं है, लेकिन गेट पर आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य है. परिसर के अंदर फोटोग्राफी सख्ती से वर्जित है, और मोबाइल फोन व कैमरे की अनुमति नहीं है.
पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण
ईएमई मंदिर अपने अनोखे धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण और आधुनिक वास्तुकला के कारण दुनियाभर के पर्यटकों और भक्तों को आकर्षित करता है. यह परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए एक आदर्श स्थान है
FIRST PUBLISHED : December 3, 2024, 11:57 IST
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