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Dugdheshwar Nath Mandir: देवरिया के दुग्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर को “छोटी काशी” कहा जाता है. यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू है और इसे ‘चंडलिंग’ कहा जाता है. मंदिर 20 एकड़ में फैला है और सावन में लाखों श्रद्धालु आते हैं.
दुधई की भक्ति से प्रकट हुए भोलेनाथ और बन गया दुग्धेश्वरनाथ महाधाम.
हाइलाइट्स
- देवरिया का दुग्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर “छोटी काशी” कहलाता है.
- मंदिर में शिवलिंग स्वयंभू है, जिसे ‘चंडलिंग’ कहा जाता है.
- सावन में लाखों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं.
देवरिया: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रुद्रपुर कस्बे में स्थित दुग्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर (Dugdheshwar Nath Baba Temple) श्रद्धा, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम है. यह मंदिर पूर्वांचल की धार्मिक पहचान के रूप में जाना जाता है और जनमानस में इसे श्रद्धा से “छोटी काशी” कहा जाता है. यहाँ स्थित शिवलिंग स्वयंभू है, जिसे ‘चंडलिंग’ कहा जाता है. इसकी गहराई आज भी एक रहस्य है. मान्यता है कि यह उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का उपलिंग है. यहां विशेष रूप से दूध से अभिषेक करने की परंपरा है, और इसी कारण इस स्थान को ‘दुग्धेश्वरनाथ’ (Dugdheshwar Nath) कहा जाता है.
गाय और मंदिर से जुड़ी कहानी
इस स्थान से जुड़ी एक रोचक लोककथा भी है. कहा जाता है कि प्राचीन काल में ‘दुधई’ नाम के एक अहीर की गाय का दूध रोजाना अपने आप ही बिना दुहे गायब हो जाता था. यह देखकर अहीर को शक हुआ और एक दिन उसने गाय का पीछा किया. तब उसने देखा कि गाय एक विशेष स्थान पर जाकर स्वयं ही थनों से दूध गिरा रही है – उस स्थान पर कोई अदृश्य शक्ति मौजूद थी. यह दृश्य देखकर वह हैरान रह गया. बाद में उसी स्थान पर शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से इस जगह को ‘दुग्धेश्वरनाथ’ के नाम से जाना जाने लगा. इसी कथा के आधार पर भक्तगण उन्हें “दूधनाथ बाबा” के नाम से भी पुकारते हैं.
20 एकड़ में फैला है मंदिर
न्यूज 18 से बातचीत में मंदिर के महंत विजय शंकर ने बताया कि इस पवित्र स्थल की स्थापना राजा वशिष्ठ सेन द्वारा की गई मानी जाती है. मंदिर लगभग 20 एकड़ में फैला है और इसका उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा-वृत्तांत एवं गोरखपुर गजेटियर में भी मिलता है. यह स्थल धार्मिक ही नहीं, राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है. संजय गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी सहित कई बड़े राष्ट्रीय नेता और देश के प्रधानमंत्री यहाँ दर्शन के लिए आ चुके हैं.
सावन में होती है रौनक
सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर का वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक शांति से परिपूर्ण रहता है.
दुग्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और चमत्कार का प्रतीक है – जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की आशा लेकर आते हैं और बाबा के आशीर्वाद से संतुष्ट होकर लौटते हैं.







