बागेश्वर: उत्तराखंड को देवी-देवताओं का निवास स्थान कहा जाता है. यहां कई सारे खास मंदिर हैं. बागेश्वर के विजयपुर में भी एक अनोखा मंदिर है. नाम है धौलीनाग मंदिर. यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है. भक्तों का कहना है कि जिंदगी की हर परेशानी का हल इस मंदिर में खीर का भोग चढ़ाने से मिल जाता है. यह परंपरा सालों से चलती आ रही है. यहां विशाल मेला भी लगता है, जहां दूर-दूर से लोग पूजा पाठ के लिए आते हैं.
बागेश्वर के धौलीनाग मंदिर की कहानी
मंदिर के पंडित कैलाश उपाध्याय ने बताया कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना नदी में रहने वाले कालिया नाग का मर्दन कर उसे दूर जाने का आदेश दिया था. तब कालिया नाग कुमाऊं में आकर बस गए. यहीं उनके पुत्र धौलीनाग का जन्म हुआ. जन्म के बाज धौलीनाग बांज के पेड़ पर रहा करते थे. ऐसा माना जाता है कि वर्तमान में जिस स्थान पर मंदिर बनाया गया है. वहीं पूर्व में बांज के पेड़ में धौलीनाग रहा करते थे. एक बार यहां अचानक भीषण आग लग गई. आग से बचाने के लिए धौलीनाग ने ग्रामीणों से मदद मांगी.
गांव वालों ने की थी मदद
उनकी पुकार पर धपोलासेरा और पोखरी गांव के लोग उनकी मदद के लिए वहां पहुंचे. तब यहां ग्रामीणों को दिव्य शिला मिली थी. बाद में ग्रामीणों ने यहां धौलीनाग का मंदिर बनाया. तब से मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी धपोला और धामी लोगों को दी गई.
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खीर का भोग लगाने से होता है चमत्कार!
मंदिर में खीर का भोग चढ़ाने के साथ ही मंदिर में आने वाले लोग अपने साथ नई फसल का अनाज, दूध, दही, घी लेकर आते हैं. धौलीनाग देवता धपोलासेरा, कांडा, पोखरी, खातोली, मिथुन कोट सहित आसपास के 22 गांवों के आराध्य देवता मानते हैं. नवरात्र के पंचमी के अलावा नाग पंचमी और ऋषि पंचमी के दिन भी मंदिर में भव्य मेला लगता है. मान्यता है कि मंदिर में आने वाला प्रत्येक भक्त कभी खाली हाथ नहीं जाता. यहां भगवान विष्णु को खीर का भोग चढ़ाने से भक्त की मनोकामना पूरी होती है.
FIRST PUBLISHED : September 12, 2024, 10:16 IST
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