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1 बार दर्शन और पूरे साल बरसेगी कृपा, महाकाल मंदिर की अनोखी भस्म आरती; ऐसे लें भाग


Agency:Bharat.one Madhya Pradesh

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Ujjain Bhasm Aarti : उज्जैन के महाकाल मंदिर में साल में एक बार दोपहर 12 बजे भस्म आरती होती है, जो आमतौर पर सुबह चार बजे होती है. यह विशेष आरती शिव नवमी के दौरान आयोजित होती है.

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साल में एक बार ही क्यों होती है महाकाल की भस्म आरती 

हाइलाइट्स

  • महाकाल मंदिर में साल में एक बार दोपहर 12 बजे भस्म आरती होती है।
  • भस्म आरती का समय तड़के 4 बजे से बदलकर दोपहर 12 बजे होता है।
  • इस विशेष आरती का श्रद्धालुओं को सालभर इंतजार रहता है।

उज्जैन. हिंदू धर्म में नवरात्रि सबसे पवित्र पर्वों में से एक है. ऐसे तो भारत वर्ष में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, लेकिन धार्मिक नगरी उज्जैन मे यह उत्सव पांच बार बनाया जाता है. बता दें कि विश्व प्रशिद्ध महाकाल ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है जो तीसरे नम्बर पर आता है. यहां की परम्परा बाकि जगहों से अलग है. महाकाल के दरबार पर रोजाना कई आरती होती हैं, जिसमे अलग-अलग रूप मे बाबा दर्शन देते हैं. सभी आरतीयों में भस्म आरती काफी प्रसिद्ध है. साल भर में एक दिन ऐसा आता है. जिसमे महाकाल कई भस्म आरती सुबह चार बजे की जगह दोपहर 12 बजे होती है. आइए जानते है ऐसा क्यों.

महेश पुजारी ने बताया कि भस्म आरती प्रतिदिन तड़के चार बजे की जाती है, लेकिन साल में सिर्फ एक दिन ऐसा होता है, जब महाकाल की भस्म आरती का समय तड़के चार बजे से बदलकर दोपहर 12 बजे होता है. इसके बाद जो 11 बर्ह्माण शिव नवरात्री के दौरान नौ दिवसीय व्रत रखते हैं, वह इस व्रत का समापन करते हैं. उसी के पश्चात शिव नवरात्रि का समापन होता है.

पंचामृत अभिषेक पूजन से होती है शुरुआत
महेश पुजारी बताते हैं कि मंदिर के पंडे-पूजारियों ने महाकालेश्वर का दूध, दही, शहद, पंचामृत और फलों के रस सहित विभिन्न द्रव्य प्रदार्थो से महाकाल को स्नान कराते हैं. पुजारी बाबा का भांग से आकर्षक श्रृंगार करेंगे. बाबा को एक विशेष पगड़ी पहनाएंगे और विधि-विधान से महाकालेश्वर की भस्मारती शुरू होगी. वर्ष में एक बार दोपहर में होने वाली इस भस्मारती का श्रद्धालुओं को सालभर इंतजार रहता है.

44 घंटे तक खुले रहेंगे महाकाल के पट
बाबा महाकाल को महाशिवरात्रि के अगले दिन सेहरा सजा कर दुहला बनाया जायेगा. सेहरा दर्शन के उपरांत वर्ष में एक बार दिन में 12 बजे होने वाली भस्म आरती होगी. भस्म आरती के बाद भोग आरती होगी और शिवनवरात्रि का पारणा किया जाएगा. सायं पूजन, श्रृंगार, सायं आरती व शयन आरती के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर जी के पट मंगल होंगे. इस दौरान श्री महाकालेश्वर भगवान के पट लगभग 44 घंटे खुले रहेंगे.

दोपहर की भस्म आरती का महत्व अधिक 
ऐसे तो सुबह चार बजे रोजाना बाबा महाकाल की भस्म आरती होती है. लेकिन साल मे एक बार ऐसा नज़ारा देखने को मिलता है. जिसमे बाबा महाकाल दोपहर बारह बजे भस्म आरती की जाती है.महेश पुजारी ने बताया मान्यता है. कि जो भी श्रद्धालु साल भर भस्म आरती के दर्शन नहीं कर पाता वो यह दोपहर कि भस्म आरती का दर्शन कर पूरा साल भर दर्शन का लाभ ले सकता है.इसलिए लाखों कि संख्या मे दोपहर की भस्म आरती का श्रद्धांलुओ को इंतज़ार रहता है.

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1 बार दर्शन और पूरे साल बरसेगी कृपा, महाकाल मंदिर की अनोखी भस्म आरती

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