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पुजारी आकाश पुजारी ने कहा कि यह लगभग 100 वर्ष पुराना मंदिर है. यहां लोगों की अवस्थाएं जुड़ी होती है. यहां चेचक जैसी संक्रामक बीमारी से लोगों को निजात मिलती है. इस मंदिर में साल भर श्रद्धालु आते हैं. लेकिन चैत्र…और पढ़ें
इस मंदिर के पुजारी आकाश पुजारी बताते हैं कि लगभग 100 वर्ष पुराना यह मंदिर है. यहां लोगों की अवस्थाएं जुड़ी होती है. यहां चेचक जैसी संक्रामक बीमारी से लोगों को निजात मिलती है. इस मंदिर में साल भर श्रद्धालु आते हैं. लेकिन चैत्र माह की अष्टमी और नवरात्र के अवसर पर अपार भी उमड़ती है. इन दिनों विशाल मेले का आयोजन होता है. भक्तजन सुबह से ही कतारो में लगकर माता के दर्शन करते हैं. महिलाएं विशेष पूजा अर्चन करती है. परिवार की सुख समृद्धि तथा बच्चों के अच्छे स्वास्थ की कामना करती हैं. मंदिर के बगल में बने पोखर में स्नान करने से कई प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं.
100 वर्ष पुराना यह मंदिर
यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि सामाजिक मेलजोल का भी स्थल माना जाता है.यहां विशेष अवसरों पर सभी वर्गों और समुदाय को लोग एकत्र होते हैं.इस मंदिर की एक खास विशेषता यह है कि यहां चढ़ावा के रूप में ठंडा भोग भक्तजन जैसे दही चावल पूरी और हलवा जैसे ठंडी पकवान अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि शीतला माता के मंदिर में कभी गर्म भोजन नहीं चढ़ाया जाता है. मऊ में तो यह स्थान धार्मिक स्थलों में शुमार है यहां लोग घूमने भी जाते हैं. क्योंकि, मंदिर परिसर को इस तरह से सजाया गया है कि मंदिर के अंदर जाते ही लगता है कि किसी जन्नत में आ गए हैं.
