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3, 5 या 7, सुबह स्नान के वक्त कितने बार लेना चाहिए मां गंगा का नाम? शास्त्रों में क्या है विधान? जानें सब


वाराणसी : भारतीय संस्कृति में गंगा नदी को विशेष महत्व दिया गया है. यह मान्यता है कि गंगा का नाम लेने मात्र से ही पापों का नाश होता है. सुबह स्नान के समय गंगा का नाम लेने की परंपरा भी इसी विश्वास और धार्मिक मान्यता का एक हिस्सा है. यही कारण है कि हर गंगा भक्त इसे अपने दैनिक प्रक्रिया में शामिल करता है. खास बात यह है कि लोगों में नाम लेने की संख्या को लेकर बड़ा कंफ्यूजन है. गंगा का नाम कितनी बार लेना चाहिए,3 , 5 या 7 बार? क्या अधिक या कम बार नाम लेने पर पुण्य नहीं मिलता? इस बारे में काशी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. संजय उपाध्याय ने विस्तार से जानकारी दी है.

पं. संजय उपाध्याय के अनुसार, “वेदों और पुराणों में गंगा का नाम लेने का विधान बहुत ही पवित्र और शुभ माना गया है. सुबह स्नान के समय गंगा का नाम 3, 5, या 7 बार लेने की परंपरा है, जो धार्मिक ग्रंथ ‘गंगा अंक’ में उल्लेखित है. शास्त्रों में तीन बार गंगा का नाम लेना न्यूनतम माना गया है. हालांकि किसी भी विषम संख्या में असंख्य बार गंगा नाम का जाप किया जा सकता है इसकी कोई सीमा नहीं है.

3, 5 या 7 बार का गंगा जाप का महत्व
पं. संजय उपाध्याय ने बताया कि गंगा का नाम 3 बार लेना त्रिकाल (भूत, वर्तमान, भविष्य) में पापों के नाश का प्रतीक है. यह संख्या न्यूनतम अवश्यक मानी जाती है. वहीं 5 बार गंगा का नाम लेना पंच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के संतुलन का प्रतीक है. यह जीवन के सभी पहलुओं में शांति और समृद्धि का आशीर्वाद माना जाता है. 7 बार गंगा का नाम लेने का महत्व सात लोकों (भूमि, पाताल, स्वर्ग, आदि) के पापों के नाश के लिए होता है. इसे सबसे शुभ माना जाता है, जो संपूर्ण शुद्धि का प्रतीक है.

जाप के लिए नहीं हैं सख्त नियम
पं. उपाध्याय ने बताया कि “शास्त्रों में गंगा का नाम लेने की संख्या को लेकर किसी प्रकार का सख्त नियम नहीं है. लेकिन विषम संख्या जैसे 3,5, 7,9,11 बार लोग इनका नाम जप सकते हैं . अगर किसी व्यक्ति ने कम बार नाम लिया या अधिक बार, तो इसका यह मतलब नहीं है कि उसे पुण्य नहीं मिलेगा. सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और भाव. गंगा का नाम सच्चे मन से लेने पर ही पुण्य प्राप्त होता है. संख्या का महत्व है, लेकिन भावना की प्रमुखता है
.
श्रद्धा और आस्था ज्यादा महत्वपूर्ण
पं. उपाध्याय कहते हैं, “धार्मिक विधानों में संख्या का महत्व तो होता है, लेकिन उससे अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और आस्था होती है. गंगा का नाम लेने का विधान इसलिए बताया गया है ताकि हम अपनी आत्मा को पवित्र और शुद्ध कर सकें. अगर हम इसे सच्चे मन से करते हैं, तो पुण्य अवश्य प्राप्त होता है, चाहे संख्या 3 हो, 5 हो, या 7 .

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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