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सुल्तानपुर के तेरये गांव में महाकाल महादेव धाम मंदिर की स्थापना 40 साल पहले नीम के पेड़ में आग लगने और शिवलिंग प्रकट होने के बाद हुई थी. हर शनिवार और सोमवार को यहां भारी भीड़ उमड़ती है.
तेरये गांव स्थित महाकाल महादेव धाम
हाइलाइट्स
- सुल्तानपुर के तेरये गांव में 40 साल पहले नीम के पेड़ से शिवलिंग प्रकट हुआ.
- महाकाल महादेव धाम मंदिर में हर शनिवार और सोमवार को भारी भीड़ उमड़ती है.
- शिवरात्रि पर मंदिर में भव्य मेला और भंडारे का आयोजन होता है.
सुल्तानपुर: हमारे देश में धर्म और आस्था का बहुत गहरा रिश्ता है. कई बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जो लोगों को हैरान भी करती हैं और आस्था से जोड़ भी देती हैं. ऐसी ही एक कहानी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के तेरये गांव से जुड़ी है, जहां महाकाल महादेव धाम नाम का एक मंदिर मौजूद है.
40 साल पुरानी घटना, जब नीम के पेड़ में लगी आग और…
मंदिर के पुजारी पंडित राजेश चतुर्वेदी ने बताया कि आज से करीब 40 साल पहले इस जगह पर एक नीम का पेड़ था. उसी दौरान गांव में बारिश नहीं हो रही थी और लोग सूखे से परेशान थे. तभी एक दिन अचानक नीम के पेड़ में आग लग गई. आग लगते ही उस पेड़ से कई सांप निकलने लगे, लेकिन किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. बता दें कि ये वहां के लोगों का दावा है. लेकिन Bharat.one इसकी पुष्टि नहीं करता.
शुरू हो गई बारिश
जब पेड़ पूरी तरह जल गया, तो उसकी जड़ से एक शिवलिंग अपने आप बाहर आया. उसी समय गांव में तेज बारिश भी शुरू हो गई. लोगों ने इसे चमत्कार माना और इस जगह को महाकाल महादेव का धाम मानकर पूजा शुरू कर दी.
शनिवार और सोमवार को उमड़ती है भीड़
इस घटना के बाद गांव वालों ने मिलकर यहां एक छोटा मंदिर बनवाया. शिवलिंग कब का है, ये आज भी किसी को नहीं पता, क्योंकि गांव के बुजुर्गों की भी कई पीढ़ियां इस शिवलिंग के बारे में जानकारी नहीं रखतीं. लेकिन श्रद्धा इतनी है कि हर शनिवार और सोमवार को यहां भारी भीड़ उमड़ती है.
शिवरात्रि पर लगता है बड़ा मेला
हर साल शिवरात्रि के मौके पर यहां भव्य मेला और भंडारे का आयोजन किया जाता है. इसमें सुल्तानपुर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी लोग दर्शन के लिए आते हैं और इस पवित्र स्थान की मान्यता को और बढ़ाते हैं.
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